यौन पीड़ित बालकों को भी मिले मुआवजा : सुप्रीम कोर्ट

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कुकर्म या यौन शोषण के शिकार लड़कों को मुआवजा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नया आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “बलात्कार, यौन उत्पीड़न और तेजाबी हमलों के मामलों में जिस तरह पीड़ित बच्चियों को मुआवजा मिलता है, ठीक वैसे ही पीड़ित बालकों को भी मुआवजा मिलना चाहिए। पीड़ितों के साथ जेंडर यानी लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।” यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों के मुआवजे पर बनी योजना को चुनौती देने वाली याचिका की बुधवार को कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, तब जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया।

जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा, “हर जीवन अनमोल है और कोई भी अदालत रुपये-पैसे की दृष्टि से उसका आकलन नहीं कर सकती है।”

गौरतलब है कि कुछ समय पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने लड़कियों के लिए बने कानून की तर्ज पर ही पीड़ित लड़कों के लिए भी नया क़ानून बनाने की बात कही थी। उन्होंने वर्तमान क़ानून में संशोधन का आज प्रस्ताव रखा था। साथ ही उन्होंने बाल यौन शोषण के पीड़ित लड़कों पर एक अध्ययन की भी घोषणा की थी। मेनका ने लड़कों से यौन शोषण पर फिल्म निर्माता इंसिया दरीवाला की ‘चेंज डॉट ओआरजी’ पर एक याचिका के जवाब में कहा था, ”बाल यौन शोषण का सबसे अधिक नजरअंदाज़ किए जाने वाला वर्ग पीड़ित लड़कों का है। बाल यौन शोषण में लैंगिक आधार पर कोई भेद नहीं है। बचपन में यौन शोषण का शिकार होने वाले लड़के जीवनभर गुमसुम रहते हैं क्योंकि इसके पीछे कई भ्रांतियां और शर्म है। यह गंभीर समस्या है और इससे निपटने की ज़रूरत है।“

देश में दुष्कर्म और बाल यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं। बुधवार को भी हरियाणा के यमुनानगर में 13 साल की बच्ची के साथ 6 लोगों के गैंगरेप करने की घटना सामने आई है। इतना ही नहीं बालिका के विरोध करने पर अपराधियों ने उसकी बाजुओं पर ब्लेड से कट लगा दिए।

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