ऑनलाइन मीडिया की खिलाफत में सरकार

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देश में इन दिनों मीडिया के लिए हालात कुछ ज्यादा मुफीद नहीं है। मीडिया के नाम पर आज सिर्फ वही संस्थाएं अस्तित्व या यूं कहें कि मजे में हैं जो सरकार की तारीफ में ग्रन्थ लिख रही हैं, यदि कोई सरकार के खिलाफ जाने की कोशिश करेगा तो निश्चित ही उसपर नकेल कसी जाएगी। हालही के दिनों में इसके कई उदहारण भी देश में देखने को मिले हैं। अभी तक सोशल मीडिया या ऑनलाइन समाचार देने वाले न्यूज़ पोर्टल पर सरकार का इस तरह का कोई दखल नहीं था, लेकिन अब सरकार ने इसे भी दबाने की तैयारी कर ली है।

देश में 2014 में बानी मोदी सरकार की बुराई करने वाले मीडिया को रोकने के लिए केंद्र द्वारा पाबंदियां लगाने की कोशिश की जा रहीं हैं। बाजार में ‘फेक न्यूज’ के नाम से भी पत्रकारिता को बदनाम किया जा रहा है, लेकिन इन सभी के बीच अब ऐसे न्यूज़ पोर्टल जो सरकार के खिलाफ लिखेंगे, या सरकार को आईना दिखाने की कोशिश करेंगे, वह अब बंद कर दिए जाएंगे।

अब देश में ऑनलाइन मीडिया के लिए नियम कानून और मानक बनाने की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। इसके दायरे में ऑनलाइन न्यूज़, डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग के साथ ही इंटरटेनमेंट और इंफोटेनमेंट कंटेंट मुहैया कराने वाली वेबसाइट्स आएंगी।

4 अप्रैल 2018 को सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से एक आदेश जारी हुआ। मंत्रालय ने इस आदेश को प्रसारित नहीं किया, लेकिन अब यह  लीक हो गया है। आदेश में कहा गया है कि देश में चलने वाले टीवी चैनल और अखबारों के लिए नियम कानून बने हुए हैं और वह अगर इन कानूनों का उल्लंघन करते हैं तो उससे निपटने के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं भी हैं, लेकिन ऑनलाइन मीडिया के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन मीडिया के लिए नियामक ढांचा कैसे बनाया जाए इसके लिए एक समिति का गठन किया जा रहा है।

10 लोगों की होगी कमेटी

ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल पर निगरानी के लिए 10 लोगों की कमेटी बनाई जाएगी। इसमें संयोजक सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव होंगे। इस कमेटी में ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ और ‘एनबीए’ के सदस्य भी शामिल होंगे। गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय के सचिव भी इस कमेटी का हिस्सा होंगे। इस समिति तय करना होगा कि ऑनलाइन मीडिया को कानून की जद में लाने के लिए क्या दायरा तय किया जाए।

विरोध के बाद सरकार ने वापस लिया फैसला

ऑनलाइन मीडिया पर निगरानी रखने के लिए नियम कानून बनाने की खातिर इस समिति का गठन ऐसे समय पर किया गया है जब फेक न्यूज को लेकर मंत्रालय के आदेश पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फेक न्यूज के मामले में पत्रकारों की मान्यता रद्द करने का प्रस्ताव किया था जिसे लेकर पत्रकारों के तमाम संगठनों समेत विपक्ष के नेताओं ने भी जबरदस्त विरोध किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और मंत्रालय ने आदेश वापस ले लिया।

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