कांग्रेस को दो टूक जवाब- नहीं लेंगे आयोग की अनुमति

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प्रदेश में 11 दिसंबर को होने वाली मतगणना से पहले ही सरकार द्वारा बुलाई गई कैबिनेट की बैठक का मामला अब और तूल पकड़ता जा रहा है। जहां कांग्रेस इस बैठक का विरोध कर रही है वहीं भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वह इस बैठक के लिए चुनाव आयोग की अनुमति नहीं लेगी।

विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले शिवराज सरकार की कैबिनेट की बैठक पर अब प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस बैठक को लेकर चुनाव आयोग की अनुमति न लेने पर चल रही चर्चाओं को सरकार ने विराम दिया है। सरकार की ओर से बयान आया है कि बैठक के लिए सरकार चुनाव आयोग की अनुमति नहीं लेगी। प्रदेश सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने यह जानकारी दी।

मिश्रा ने कहा कि हम आचार संहिता के नियमों से पूरी तरह वाकिफ हैं, इसलिए चुनाव आयोग की अनुमति लेना जरूरी नहीं है। बुधवार को 10.30 बजे कैबिनेट की बैठक होगी। इस मामले में इससे पहले चुनाव आयोग का भी बयान सामने आया था।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव के मुताबिक, कैबिनेट की बैठक को लेकर चुनाव आयोग को कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। कांताराव ने कहा कि इस बैठक में शासन की ओर से किसी भी तरह का बड़ा निर्णय या फिर योजना को मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसे लेकर सरकार को चुनाव आयोग से अनुमति लेना ज़रूरी है।

जैसे ही सरकार द्वारा 5 तारीख को कैबिनेट की बैठक बुलाने की जानकारी सामने आई थी कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर हमला किया था। इसे लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग को शिकायत भी की थी। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री को मंत्रालय जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार नियमों के खिलाफ जाकर कार्य कर रही है, वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को नियमों की जानकारी नहीं है।

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