सुबोध के बेटे का सवाल, अब किसके पापा की जान जाएगी?

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बुलंदशहर में गोकशी के शक में लोगों ने स्याना पुलिस थाने को अपना निशाना बनाया और पथराव, आगजनी व फायरिंग की। बेकाबू हुई भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल दिया और इस घटना में स्याना के पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई। इस हिंसक घटना में पुलिस इंस्पेक्टर के साथ ही एक ग्रामीण की भी मौत हो गई। युवक का नाम सुमित बताया जा रहा है। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को पहले भीड़ ने ईंट से मारा, जिसके कारण इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के सिर पर गहरी चोट आई और वे घायल हो गए। इसके बाद सुबोध ने अपने बचाव में फायर किया और गोली भीड़ में एक युवक के पैर को छूकर निकल गई। इसके बाद भीड़ ने सुबोध से उनकी सर्विस रिवॉल्वर भी छीन ली।

इसके बाद भीड़ में से किसी ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के सिर में गोली मार दी, जिसके कारण इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई। सुबोध कुमार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उनके सिर में जो गोली मारी गई वह 0.32 बोर की गोली थी। इसके बाद इंस्पेक्टर सुबोध का शव परिजन को सौंप दिया गया। सुबोध के पार्थिव शरीर को एटा उनके पैतृक घर पर लाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुबोध की मौत की खबर सुनकर उनके परिजन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सुबोध के दो बेटे हैं। जैसे ही सुबोध की मौत की खबर उनकी धर्मपत्नी को मिली तो वे बदहवास हो गईं और रोते – रोते एक ही बात बोल रही थीं कि मुझे उनसे एक बार मिल लेने दो, एक बार उन्हें देख लेने दो।

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के बेटे ने मीडिया से बात करते हुए कहा,“ स्याना चौकी में जहां पापा की ड्यूटी लगी थी, वहां पथराव हुआ, जिसमें पापा के सिर पर चोट लगी थी। पापा को कॉन्स्टेबल वापस ले जा रहे थे तब पापा की जीप पर फिर से पथराव हुआ। कॉन्स्टेबल और पापा के साथ जो लोग थे, वे उन्हें छोड़कर वहां से भाग गए। फिर पापा के सिर में बायीं तरफ गोली मारी गई।“ आगे उनके बेटे ने कहा कि एक अच्छा नागरिक, एक ऐसा नागरिक, जो किसी भी रिलीज़न के नाम पर कोई उत्पात न मचाए। चाहे वह किसी भी धर्म का हो, यहां सब एक हैं। सुबोध के बेटे ने सवाल किया कि आज हिन्दू-मुस्लिम के झगड़े में मेरे पापा की जान गई, आप बताइए कल किसके पापा की जान जाएगी?

इसके बाद बुलंदशहर के आला अधिकारियों ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। उनके पार्थिव शरीर को पुष्पांजलि अर्पित किया गया| इसके बाद उन्हें 21 फायर कर सलामी दी गई। सुबोध को ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया गया। आज एटा में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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