जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग

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जम्मू-कश्मीर में दिनभर चले घटनाक्रम के बाद आखिरकार शाम  को सियासी समीकरण फेल हो गए। पीडीपी द्वारा कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा करने वाली मेहबूबा मुफ्ती सरकार नहीं बना पाई। शाम को राज्यपाल सतपाल मलिक ने राज्य विधानसभा को भंग कर सरकार बनाने की संभावनाओं को खत्म कर दिया।

इससे पहले पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन पत्र के साथ राज्यपाल को चिट्ठी लिखी थी।  वहीं दिनभर पीडीपी के अंदर बगावत की खबरें भी आती रहीं। पीडीपी विधायक इमरान अंसारी ने दावा किया था कि उनके साथ 18 विधायक हैं। उन्होंने कहा था कि हम भी राज्यपाल के सामने सरकार  बनाने का दावा पेश करेंगे।

इधर, पीडीपी के नेता अल्ताफ बुखारी के नाम को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया गया था, लेकिन दिनभर चली रस्साकशी के बाद शाम को राज्यपाल ने राज्य विधानसभा को भंग कर दिया। राजभवन से इस संबंध में देर शाम बयान जारी किया गया।

अभी था राज्यपाल शासन

मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू था, जिसकी 6 महीने की समयावधि 19 दिसंबर को समाप्त हो रही थी। यूं भी इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था।  जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन टूटने के बाद लागू हुआ था। राज्यपाल शासन के बाद राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए विधानसभा का भंग होना ज़रूरी था।

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