बीजेपी की विधायक खरीदी कोरोना में भी जारी, जानिए पूरी खबर

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एक और जहा देश कोरोना संकट से जंग लड़ रहा है और दूसरी और पीएम मोदी की सरकार खुद की पीठ थपथपा रही है. सरकार इन सब के बीच  विपक्ष के हर मशवरे को अनदेखा करते हुए उल्टा उसी पर कोरोना में भी राजनीती करने का आरोप लगा रही है. लेकिन इस बीच बीजेपी यह भूल गई की नियम सभी पर लागु होते है और कोरोना काल में सब की जिम्मेदारी बराबर की है. इस सब के इतर बीजेपी ने एक बार फिर अपने खेमे को मजबूती देने के लिए विधायकों की खरीद फ़रोख्त शुरू कर दी है. गुजरात राज्यसभा के लिए खुद को मजबूत करते हुए बीजेपी ने कांग्रेस के कुछ विधायको. से संपर्क साधा है ऐसा आरोप कांग्रेस के बड़े नेता बीजेपी पर लगा रहे है. तभी तो अचानक कर्जन से कांग्रेस विधायक अक्षय पटेल, के आलावा जीतू भाई पटेल और ब्रजेश मेरजा जैसे आठ और भी कांग्रेसी विधायक बीजेपी का दामन थामने का मन बना चुके है. अब कांग्रेस की राज्यसभा में 2 सिट का गणित गड़बड़ा सकता है.

बीजेपी पर यह भी आरोप है की मप्र में शिवराज की ताजपोशी के लालच में लाकडाउन 11 मार्च को नहीं लगाते  हुए सरकार गिराने और शिवराज सरकार के बन जाने तक की देरी की गई जिसका खामियाजा देश क जनता भुगत रही है.  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने बीजेपी पर विधायक खरीदने का आरोप लगते हुए कहा कि गुजरात सरकार देश की पहली राज्य सरकार है जिसने जनता को त्याग दिया और मजदूरो से पैसा वसूलने में लगी है. और इन सब के बीच बीजेपी गुजरात में विधायक खरीदने का काम भी कर रही है .

बता दे की गुजरात सरकार ने कोरोना टेस्टिंग सबसे कम की है और आदेश दिए है कि मजदूरो से ट्रेन का किराया वसूला जाये.

एक अन्य खबर के अनुसार कोरोना से झुंझ रहे बिहार में बीजेपी दिसम्बर में होने वाले विधानसभा चुनावो की तैयारी में लगी है और उसने 7 जून को वहा वर्चुअल चुनावी रैली का ऐलान किया है. जिसका अन्य दल थाली और ताली बजाकर विरोध कर रहे है.  इसी सन्दर्भ में कांग्रेस नेता राजीव त्यागी बताते है की बीजेपी इस समय भी जश्न में डूबी है और मप्र के बाद अब गुजरात और बिहार में भी कोरोना के प्रति लापरवाह हो गई है. सरकार पर यह भी आरोप है कि पीएम केयर फंड में पारदर्शिता की कमी है क्योकि इसके सदस्य पीएम मोदी सहित गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह है जो की सरकार में है, ऐसे में बाकि चार सदस्यों में विपक्ष को स्थान दिया जाना था .

कुल मिलाकर मप्र की सरकार का बनना, गुजरात में राज्यसभा पर नजर और अब बिहार में चुनावी रैली सरकार के गैर-जिमेदाराना रवैये के ताजा उदाहरण है और साथ ही यह भी जताता है कि सरकार कोरोना काल में कितनी गंभीर है. साथ ही पीएम केयर फंड में विपक्ष से किसी का न होना भी प्रश्न चिन्ह खड़े करता है . बीजेपी की केंद्र सरकार को देखकर कहा जा सकता है कि स्पष्ट बहुमत का मतलब शायद मनमानी होता है ….

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