इन कारणों से बिहार ने एनडीए पर फिर से भरोसा जताया

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बिहार में एक बार फिर एनडीए और नीतीश कुमार की सरकार बनने जा रही है .कांटे की टक्कर देने के बावजूद भी तेजस्वी और उनके सहयोगी इस रेस में पिछड़ गए. मतदान का अंत एनडीए की जीत के साथ हुआ और कुल 246 विधानसभा वाले बिहार राज्य में इंडिया ने इस बार 125 जबकि जेडीयू और उसका सहयोगी ने 110 सीटों पर कब्जा किया.अब बारी है चुनाव परिणामों के बाद मंथन की तो इस बार एनडीए और नीतीश कुमार के लिए चुनाव के परिणामों को को अफेक्ट करने वाले मुख्य फैक्टर कुछ अलग ही रहे.

पहला फैक्टर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे सभाएं और उनकी वह छवि जो मतदाताओं को रिझाने में कामयाब रहे.
2014 से पीएम मोदी लगातार लोकप्रिय नेताओं की लिस्ट में पहले पायदान पर कायम है और उनका यह जादू बिहार में भी चला मोदी पर एक अनजाना सा विश्वास मतदाताओं का रहा है इसका पूरा फायदा बीजेपी को भी बिहार में हुआ है साथ ही सहयोगी एनडीए ने एक बार फिर अपना परचम लहराया.दूसरे फैक्टर की बात करें तो मुस्लिम वोट. नीतीश कुमार की छवि बिहार में सूरत बदल देने वाले मुख्यमंत्री के रूप में कायम रहे और उसका फायदा मुस्लिम वोटरों को रिझाने में हुआ तमाम अटकलों के बावजूद बिहार के मुस्लिम वोटरों ने नीतीश कुमार का भरपूर साथ दिया और नतीजा रहा कि एनडीए एक बार फिर बिहार की सत्ता पर काबिज हो रही है.

तीसरे फैक्टर की अगर बात करें तो महिला वोटर भी इस बार इंडिया के पाले में ज्यादा ही है नीतीश कुमार के साथ छवि और नरेंद्र मोदी के भाषणों से प्रवाहित होकर महिला वोटरों ने भी इस बार बीजेपी और जेडीयू का साथ दिया है.नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान दहेज प्रथा जैसी कुरीति को बंद करने के लिए जो आंदोलन चलाए और इसके अलावा भी महिला और बाल कल्याण विकास के लिए.उनके किए गए सराहनीय कार्य उन्हें इस चुनाव में फायदा पहुंचा गए.छोटा और सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर है कमजोर विपक्ष.हालांकि तेजस्वी ने कड़ी टक्कर दी है लेकिन कहीं ना कहीं कांग्रेसका साथ होने से उन्हें नुकसान ही हुआ है दूसरा लालू प्रसाद की जो छवि इतने सालों से बिहार में बनी आ रही है वह भी तेजस्वी के लिए नुकसान का सौदा रही.

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