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इस मगरमच्छ के लिए रोया पूरा गांव

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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में 130 साल के गंगाराम की मौत हो गई। गांव वाले गंगाराम को देवता मानते थे। अब गांववालों ने गंगाराम के सम्मान में मंदिर बनाने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार की सुबह जब अचानक गंगाराम पानी के ऊपर आ गया तो, तो लोगों को कुछ संदेह हुआ। पास जाकर देखा तो गंगाराम मर चुका था।

शव को बाहर निकाला गया और पूरे गांव में ख़बर आग की तरह फैल गई। सभी लोग गंगाराम के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। जानकारी वन विभाग तक पहुंची तो विभाग ने पोस्टमार्टम करने के लिए मांग की। स्थानीय लोगों ने गांव में ही पोस्टमार्टम करने का अनुरोध किया, जिसे मान लिया गया।

इसके बाद गंगाराम के शव को सजाकर ट्रैक्टर पर रखा गया और पूरे गांव में पार्थिव शरीर को घुमाया गया। ढोल-मंजीरे के साथ शवयात्रा निकाली गई और गांववाले अपने आंसू थाम नहीं सके। तालाब के पास ही गंगाराम को दफनाया गया।

ग्रामीणों के अनुसार, इस गांव में महंत ईश्वरीशरण देव यूपी से आए थे, जो एक सिद्ध पुरुष थे। वह अपने साथ पालतू मगरमच्छ लेकर आए थे। उन्होंने गांव के तालाब में उसे छोड़ दिया था। वे इस मगरमच्छ को गंगाराम कहकर पुकारते थे। उनके पुकारते ही मगरमच्छ तालाब के बाहर आ जाता था।

गांव वाले गंगाराम को देवता की तरह पूजते रहे हैं। ग्रामीणों को कभी भी गंगराम ने परेशान नहीं किया। ग्रामीणों का कहना है कि गंगाराम से उनका रिश्ता कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। गंगाराम के शव को गांव में घुमाने से पहले लोगों ने उसकी पूजा की। अब उसकी याद में गांव में मंदिर निर्माण कराया जाएगा। गंगाराम शाकाहारी भोजन करता था। लोग उसे दाल-दावल देते थे, जिसे वो बड़े चाव से खाता था। गांववालों में इस मगरमच्छ के प्रति आस्था इतनी है कि उन्होंने अब गंगाराम का मंदिर बनवाने का फैसला लिया है।

कुशाग्र

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