अयोध्या राम मंदिर विवाद पर टला फैसला…

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला वर्षों पुराना है| राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन को लेकर वर्षों से तारीख पर तारीख का खेल चल रहा है| राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं शीर्ष अदालत में दायर की गई| आज यानी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस के एम जोसफ की बेंच ने भी फैसले के लिए नई तारीख का ऐलान कर दिया| अब इस मामले पर अगली सुनवाई आने वाले साल में यानी जनवरी में होगी|

कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर केवल मात्र 3 मिनट में ही सुनवाई टल गई| अब यह मामला करीब 3 महीने बाद ही कोर्ट में उठेगा| चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ये मामला अर्जेंट सुनवाई के तहत नहीं सुना जा सकता है|

गौरतलब है कि इसके पहले 27 सितंबर 2018 को हुई सुनवाई में कोर्ट के ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ वाले फैसले के खिलाफ याचिका पर पुनर्विचार से इनकार कर दिया था और कहा था कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला इस मामले में प्रासंगिक नहीं है| 27 सितंबर को ही कोर्ट ने 29 अक्टूबर की तारीख तय की थी|

फैसले के पहले श्रीराम जन्‍मभूमि न्‍यास के अध्‍यक्ष महंत नृत्‍य गोपाल दास ने ने कहा, “राम मंदिर निर्माण के लिए हमें सिर्फ भगवान पर भरोसा है, किसी व्‍यक्ति पर नहीं| एक ओर पीएम मोदी हैं तो एक ओर सीएम योगी है| मंदिर निर्माण का यह सही वक्‍त है| हम लोग किसी नेता को नहीं बुलाते हैं, हम सिर्फ भगवान को बुलाते हैं| अयोध्‍या में राम मंदिर निर्माण होना चाहिए| हम किसी के भरासे नहीं हैं| हम सभी सुप्रीम कोर्ट का सम्‍मान करते हैं, लेकिन उनकी बातों का सम्‍मान नहीं करते| हमें विश्‍वास है कि मोदी सरकार में राम मंदिर बनेगा|”

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