अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शुभारंभ

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राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की निगरानी में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए काम शुरू करा दिया गया है. भूमि पूजन के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण मिला है. इसके इतर मुस्लिम समुदाय की ओर से बाबरी मस्जिद के बदले मिली पांच एकड़ जमीन पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की और से कोई गतिविधि नही दिख रही है . 

अयोध्या राम जन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण के लिए तीन एकड़ जमीन को समतल किया जा चूका है. राम मंदिर निर्माण की तैयारी तेजी से चल रही है. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने जुलाई में भूमि पूजन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम् और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ भूमि दी है जिसे योगी कैबिनेट ने 5 फरवरी को ही मंजूरी दे दी थी. यह जमीं अयोध्या जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम धन्नीपुर तहसील सोहावल में थाना रौनाही से लगभग 200 मीटर पीछे आवंटित की गई है, जिसे सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड ने स्वीकार किया है. 

सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के मुखिया जुफैर फारुकी ने इस पर बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन का अलॉटमेंट लेटर तो दे दिया था, लेकिन जमीन का मलिकाना कब्जा सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को 31 मार्च 2020 तक नहीं मिल सका था. 31 मार्च को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर हमारा कार्यकाल खत्म हो गया है और सरकार ने अगर इसके बाद किसी तरह का कोई फैसला किया है तो वो मुझे नहीं मालूम है. हालांकि, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद निर्माण के साथ-साथ और भी कई चीजें करने की रूप रेखा तैयार की थी.

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जुफैर फारुकी ने कहा कि इसके लिए हमने ‘इंडो इस्लामिक कल्चर ट्रस्ट’ (आईआईसीटी) का गठन किया था. वहां पर मस्जिद निर्माण के साथ अस्पताल, विद्यालय और रिसर्च सेंटर स्थापित करने की रूप रेखा तैयार की थी. इंडो इस्लामिक कल्चर के जरिए सामाजिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए इंस्टीट्यूट, लाइब्रेरी, पब्लिक यूटिलिटी इनफ्रास्ट्रक्चर डेवेलप करने की मंशा थी. 

उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के भारत आने बाद जो एक कल्चर डेवलप हुआ, जिसे हम एंडो इस्लामिक कल्चर कहते हैं, उसे इस संस्थान के जरिए भारतीय सभ्यता को देश और पूरी दुनिया के सामने रखने का प्लान था. भारतीय व इस्लामिक सभ्यता पर शोध करने और उसे प्रदर्शित करने की योजना थी. इस दिशा में कदम बढ़ाते उससे पहले ही सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर हमारा कार्यकाल खत्म हो गया, जिसके चलते हम इसे जमीन पर नहीं उतार सके.

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  जुफैर फारुकी ने कहा कि मौजूदा समय में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद पर होते तो निश्चित तौर पर सरकार द्वारा दी गई पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद निर्माण की दिशा में काम शुरू करा देते. उन्होंने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जमीन के आवंटन के साथ ही इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी थी. वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद के साथ-साथ कई चीजें निर्माण के प्रस्ताव आए हैं.  

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