क्या भगवान राम या जीसस ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा ?

0

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में अयोध्या जन्म भूमि के मामले में कोर्ट ने सवाल किया कि क्या कभी भगवान राम या जीसस ने किसी मामले पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है? इतना विवाद क्यो किया जा रहा है। मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई नियमित सुनवाई बुधवार को भी जारी रही। सुनवाई के दौरान सबसे पहले निर्मोही अखाड़े की ओर से दलील पेश की गई। इसके बाद मालिकाना हक के लिए बहस शुरू हुई। बहस के दौरान बाल्मीकि रामायण और जीसस के भी उदाहरण दिये गए।

इस्लामाबाद में अखंड भारत के नारे

निर्मोही अखाड़े की तरफ से वकील सुशील जैन ने अपना पक्ष रखा और कहा कि यह मालिकाना हक़ की लड़ाई नहीं है। ये कब्जे की लड़ाई है। इस विवादित जमीन पर शुरू से अखाड़े का कब्ज़ा रहा है। लिहाजा मामला कब्जे का है। इसके बाद निर्मोही अखाड़े के वकील से जस्टिस बोबड़े ने सवाल किया कि  क्या निर्मोही अखाड़े को सेक्शन 145 सीआरपीसी के तहत राम जन्मभूमि पर दिसंबर 1949 के सरकार के अधिग्रहण के आदेश को चुनौती देने का अधिकार है? क्योंकि उन्होंने इस आदेश को लिमिटेशन अवधि समाप्त होने के बाद चुनौती दी।

भारत पाकिस्तान के एटम बम के निशाने पर…

जस्टिस बोबड़े के सवाल के बाद निर्मोही अखाड़े के वकील जैन ने अपनी बात राखी और जवाब देते हुए कहा कि उनका केस लिमिटेशन एक्ट 1908 के तहत आर्टिकल 47 के दायरे में आता है। अगर अंतिम आदेश सेक्शन 145 के तहत आता है तो लिमिटेशन अवधि जारी रहेगी। जवाब सुनने के बाद चीफ जस्टिस गुस्सा हो गए। उन्होने कहा कि आप जिस फैसले का उदाहरण अपनी दलीलें में दे रहे हैं, वो SCR (सुप्रीम कोर्ट वीकली रिपोर्ट किताब) से लिया गया है या फिर SCC (सुप्रीम कोर्ट केसेस) के आधार पर दे रहे हैं. जो दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध ही नहीं है, उसका उदाहरण न दें।

Unnao Rape Case : CBI ने किया कुलदीप सिंह सेंगर की हैवानियत का खुलासा

जब कोर्ट कि ओर से कहा गया की इस मामले से संबंधित रेकॉर्ड हमारे समाने रखें तो वकील ने बताया कि 1982 में एक डकैती के दौरान यह दस्तावेज नष्ट हो गए। यह सुनने के बाद कोर्ट ने दूसरे साक्ष्य सामने रखने का आदेश दिया।

Share.