जेल से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा आसाराम

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अपनी शिष्या के साथ दुष्कर्म का अपराधी आसाराम फिलहाल जोधपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। लम्बे समय से जेल मे बंद आसाराम का बाहरी दुनिया से मोह नहीं ख़तम हो रहा है। बाहर निकलने के लिए आसाराम ने अब राजस्थान के राज्यपाल के पास दया याचिका लगाई है। आसाराम ने राज्यपाल कल्याण सिंह को पत्र लिखकर दया की गुहार लगाई है। उनके द्वारा इससे पहले कोर्ट में भी पेरोल की अपील की थी लेकिन कोर्ट द्वारा इसे ख़ारिज कर दिया गया था। इसी के चलते इस बार आसाराम ने राज्यपाल के साथ साथ जिलाधिकारी के पास भी पैरोल के लिए आवेदन किया है।

दया याचिका को राजभवन ने गृह विभाग भेज दिया है। आसाराम ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के पास अपनी सजा कम करने की अपील की है।  लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। याचिका में आसाराम ने सजा को कम करने सहित अन्य राहत मांगी है। आसाराम बहुत समय से जेल से बहार निकलने की कोशिश में लगे हैं। उनके द्वारा दी गई अब तक 10 जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है। निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लगाई गईं दया याचिकाएं लगातार खारिज होती रही हैं।

राज्यपाल कल्याण सिंह ने आसाराम की दया याचिका पर गुजरात और राजस्थान सरकार से रिपोर्ट मांगी है। राज्यपाल की ओर से रिपोर्ट मांगने पर राज्य के गृह विभाग ने सभी संबंधित विभागों को चिट्ठी भेजकर इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। देश के नामी वकील राम जेठ मलानी से लेकर सुब्रमण्यम स्वामी तक ने आसाराम की जमानत के प्रयास कर लिए, लेकिन सभी उन्हें जेल से बाहर निकालने में विफल रहे।  15 अगस्त 2013 की रात को राजस्थान के जोधपुर स्थित मणाई आश्रम में आसाराम ने पीड़िता नाबालिग के साथ यौन शोषण किया था। दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिए जाने के बाद आसाराम को ताउम्र जेल में रहना होगा।

आसाराम मामले में अर्जियों का सिलसिला शुरू

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