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जेठमलानी को निकालने पर मानी गलती

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देश के वरिष्ठ वकीलों में शुमार राम जेठमलानी की बीजेपी से नाराज़गी खत्म होती दिख रही है। साल 2013 में बीजेपी ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। अब बीजेपी और राम जेठमलानी ने संयुक्त रूप से दिल्ली पटियाला कोर्ट में इस मुकदमे को खत्म करने के लिए आवेदन दिया है।

2013 में बीजेपी से निष्कासन के बाद राम जेठमलानी ने अदालत में मुकदमा दायर किया था। जेठमलानी ने 50 लाख का मुआवजा भी मांगा था। 95 साल के राम जेठमलानी और बीजेपी ने अदालत से संयुक्त रूप से दरख्वास्त की है कि आपसी सुलह से समझौते के लिए एक आदेश पारित किया जाए। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जेठमलानी पर कार्रवाई के लिए खेद जताया है।

राम जेठमलानी  के इस आवेदन पर अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सुमित दास के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है। संयुक्त अर्जी में कहा गया कि प्रतिवादी नंबर एक पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने महासचिव प्रतिवादी नंबर एक पार्टी के महासचिव भूपेंद्र यादव संग वादी से मुलाकात की।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने पार्टी के विकास में राम जेठमलानी के योगदान को स्वीकार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और महासचिव भूपेन्द्र यादव ने स्वीकार किया है कि राम जेठमलानी बीजेपी के संस्थापक वाइस प्रेसिडेंट रहे हैं और पार्टी के विकास के लिए उन्होंने अनवरत काम किया है।

अदालत को दिए आवेदन में कहा गया है कि राम जेठमलानी ने बीजेपी अध्यक्ष और महासचिव द्वारा प्रकट किए गए खेद को स्वीकार किया है। आवेदन-पत्र के मुताबिक, दोनों पक्षों ने इस विवाद से जुड़े सभी मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझा लिया है। राम जेठमलानी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल में केंद्रीय कानून मंत्री थे। तब वे बीजेपी के जाने-माने नेताओं में शामिल थे।

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