Video: 12500 स्क्वेयर फ़ीट बनेगा गुजरात का भव्य अक्षरधाम मंदिर

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देशभर में 13 से 23 सितंबर तक गणेशोत्सव उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन की इंदौर में भी विशेष धूम होती है। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी इंदौर के पूर्वी क्षेत्र में ‘इंदौर के राजा’ अपने वैभव के साथ विराजित होंगे।  प्रदेश के साथ अन्य राज्यों से भी इंदौर के राजा के दर्शनों के लिए श्रद्धालु शामिल होंगे । मध्यभारत के इस अद्भुत पंडाल में इस बार गुजरात के गांधीनगर स्थित अक्षरधाम मंदिर की भव्य प्रतिकृति साढ़े बारह हज़ार स्क्वेयर फ़ीट में बनाई जा रही है। इस आकृति को मूर्तरूप देने के लिए गत 1 माह से ख्यात 90 कारीगर अपनी प्रतिभा का जादू बिखेर रहे हैं।

इंदौर के ‘आलोक दुबे फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित  ‘इंदौर के राजा’ के  भव्य आयोजन के लिए शहर के पूर्वी क्षेत्र विजय नगर चौराहे के समीप  सवा लाख स्क्वेयर फ़ीट के विशाल मैदान पर पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। आयोजक आलोक दुबे ने बताया कि 10 दिवसीय गणेशोत्सव में 50 लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान लगाया  है| इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

90 बाय 30 का गर्भगृह है मुख्य आकर्षण

दुबे ने बताया कि बंगाल के हुनरमंद कारीगरों द्वारा गुजरात के अक्षरधाम मंदिर की हूबहू प्रतिकृति 100 बाय 125 स्क्वेयर फ़ीट में निर्मित की जा रही है। साथ ही अंदर की ओर विशाल प्रतिकृति के लिए 90 बाय 30 का विशाल गर्भगृह बनाया गया है। इस गर्भगृह के अंदर आकृति महलनुमा बनाई जा रही है| इसकी छत और दीवारों को इस प्रकार से बनाया जा रहा है कि देखने वालों को यहां अक्षरधाम के दर्शन हो सकेंगे।  इसमें छत और दीवारों को जोड़ने के लिए थर्माकोल से निर्मित मनमोहक मेहराब के साथ 26 छोटे झूमर, 3 बडे डोमनुमा झूमर, 2 विशाल नक्काशीदार सितारे छत को भव्यता एवं जीवंत स्वरूप दे रहे हैं| वहीं  दीवारों पर कलश, मोरपंख के साथ-साथ विशाल पिल्लर की आकृतियां, कमल पुष्प पर अलग-अलग मुद्राओं में 20 से ज्यादा आकृतियां आदि अनेक विशेषताएं इस गर्भगृह को अनोखा बनाती हैं।

बांस, बल्ली और कपड़े का होगा रीयूज़

आयोजक आलोक दुबे ने बताया कि गणेशोत्सव के पांचवें वर्ष में  इस विशाल स्ट्रक्चर को बनाने के लिए 21 हजार बांस, 10 हजार रनिंग मीटर कपड़ा, 15 फ़ीट की 101 बल्लियों के साथ दो ट्रक थर्माकोल का फिर से  उपयोग किया जा रहा है। दुबे ने बताया कि फाउंडेशन का उद्देश्य पर्यावरण हितैषी उत्सव मनाना है, इसके लिए इस उत्सव और इस विशाल प्रतिकृति में लगने वाला सारा सामान रीयूज़ होगा। यहां लगने वाली बांस -बल्लियों को अगले वर्ष फिर उपयोग में लाया जाता है। इसमें लगने वाला 10 हजार मीटर कपड़े  से जरूरतमंद बच्चों के कपड़े  बनवाए जाएंगे। थर्माकोल से बनी आकृतियों को कंपनी वापस ले लेगी।  इस प्रकार इस पूरे आयोजन को जीरो वेस्ट और इको फ्रेंडली बनाया जा रहा है।

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