आपातकाल के बाद इन नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा

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हाल ही में आपातकाल की बरसी के नाम पर बीजेपी के नेताओं ने जमकर कांग्रेस को कोसा और वो भी ज्ञान देने लगे जिनका जन्म भी उस समय नही हुआ था. सोशल मीडिया से शिक्षित युवा नेता भी इन दिनों पीछे नही है. 45 साल पहले 25 जून 1975 को देश में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा हुई थी. सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डालने के आदेश दिए गए. उस समय जनसंघ और समाजवादी पार्टी उभर रही थी. इस फैसले ने इंदिरा गांधी को खूब बदनामी दी. लेकिन आपातकाल के दौरान जो जुल्म और ज्यादतियां हुईं उसके असली मुजरिम कांग्रेस के कुछ गद्दार नेता थे. इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी अपने करीबियों के बहकावे में आ गए और आपातकाल में नसबंदी, दिल्ली के सौंदर्यीकरण के लिए जबरन झुग्गियों को उजाड़े जाने जैसे कई गलत काम कर गए.

वो नेता, जिसने दाव पर लगा दी थी ...

उस समय उन्हें बरगालने और आपातकाल को इतना भीषण बनाने में कई नेता ऐसे थे, जो बाद में बीजेपी के साथ हो लिए और अपना दामन बचा गए. आपातकाल के कांग्रेस में रहे कुछ नेताओं ने बाद में अलग पार्टी बनाई, और यु टर्न लेकर बीजेपी के साथ  सरकार में आ गए. आज भी बीजेपी आपातकाल के नाम पर ढोल पिट कर कांग्रेस पर वार का कोई मौका नही छोडती लेकिन क्या कभी बीजेपी ने इन कुछ नेताओं से सवाल करने की हिम्मत दिखाई –

जगमोहन मलहोत्रा

इमरजेंसी के खलनायक, जो भाजपा के नायक ...

जगमोहन मलहोत्रा संजय गांधी के सबसे करीबियों में उस समय का बड़ा नाम. जगमोहन एक आईएएस अधिकारी और दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन थे. आपातकाल में दिल्ली को खूबसूरत बनाने का काम जगमोहन के हाथ में था . जगमोहन ने कई झुग्गियों को हटाना शुरू किया और  विरोध हुआ, जगमोहन ने सरकारी आदेश पूरा किया और 1980 में कांग्रेस ने सत्ता में आते ही उन्हें दिल्ली का उपराज्यपाल बना कर इनाम दिया  .

आपातकाल की ज्यादतियों के वो चेहरे ...

 

1984 में जगमोहन जम्मू-कश्मीर के गवर्नर बने .इंदिरा गांधी के निधन के बाद जगमोहन ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के समय जगमोहन को शहरी विकास, पर्यटन मंत्रालय और सूचना मंत्रालय मिला .

मेनका गांधी

Rahul Gandhi | Former Union Minister Maneka Gandhi on Rahul Gandhi ...

1975 में देश में आपातकाल लगाया गया तो उसके पीछ संजय गांधी की अहम भूमिका रही. संजय गांधी ने अपनी युवा नेताओं की टीम के साथ आपातकाल के दौरान काफी जुल्म किए थे. मेनका गांधी संजय गांधी की पत्नी थीं, ऐसे में संजय के हर फैसले में उनकी भूमिका मानी जाती है. मेनका गांधी ने संजय गांधी के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी घोषित करने के लिए अमेठी से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन जीत नहीं सकीं.

मेनका गांधी ने संजय के खास रहे अकबर अहमद डंपी के साथ मिलकर राष्ट्रीय संजय मंच बनाया, जो लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से बनाया गया था. 1988 में वो वीपी सिंह के जनता दल में शामिल हो गईं और1989 में पीलीभीत से जीतकर लोकसभा पहुंचीं. 1999 में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार पीलीभीत से सांसद बनी मेनका गांधी ने उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी का केंद्र में समर्थन किया और उन्हें केंद्र में मंत्री भी बनाया गया. 2004 में आधिकारिक तौर पर मेनका गांधी बीजेपी में शामिल हो गईं. मेनका लगातार चौथी बार बीजेपी के टिकट पर लोकसभा पहुंच चुकी हैं. इसके बाद उनके बेटे वरुण गांधी भी बीजेपी के टिकट से तीसरी बार सांसद हैं.

विद्या चरण शुक्ल  

विद्याचरण शुक्ल : प्रोफाइल

देश में आपातकाल लगने से पहले विद्याचरण शुक्ल रक्षा राज्यमंत्री थे और बाद में वे भी कांग्रेस से किनारा कर गए

 

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