कलेक्टर-कमिश्नर को लेकर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला…

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कमलनाथ सोमवार को  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। उनके शपथ लेते ही कई अफसरों पर तबादले की गाज गिरना तय मानी जा रही है। इनमें लंबे वक्त से एक ही विभाग में पदस्थ या भाजपा के चहेते अधिकारी शामिल हैं। बाकायदा ऐसे अफसरों की सूची भी तैयार की जा रही है, लेकिन कांग्रेस को चुनाव आयोग ने एक करारा झटका दिया है। चुनाव आयोग ने बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादलों पर रोक लगा दी है। अब किसी अधिकारी का तबादला करना है तो कांग्रेस को पहले चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी।

दरअसल, अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं इसलिए चुनाव आयोग अभी से तैयारियों में जुट गया है। 26 दिसंबर को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होगा। इसके साथ ही नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के दावे-आपत्ति लेने का कार्य शुरू हो जाएगा। ऐसे में मतदाता सूची तैयार करने के कारण चुनाव आयोग ने कमिश्नर और कलेक्टर से लेकर बूथ लेवल अधिकारियों के 26 दिसंबर के बाद बिना पूछे तबादले करने पर रोक लगा दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 25 जनवरी तक दावे-आपत्ति लिए जाएंगे और 11 फरवरी के पहले इनका निराकरण होगा। 18 फरवरी तक मतदाता सूची की तैयारी कर 22 फरवरी को अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इस सूची के आधार पर लोकसभा चुनाव होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के पहले सप्ताह में लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लग सकती है। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के कार्य से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को बिना अनुमति हटाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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