इस वजह से होगा तीसरा विश्व युद्ध, जानिए कारण

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प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध में हुई भारी क्षति से दुनिया हिल गई थी| अब कहा जा रहा है कि देशों  के बीच तीसरा विश्व युद्ध भी छिड़ सकता है| लेकिन तीसरे विश्व युद्ध का मकसद जमीन और ताकत हासिल करना नहीं होगा, बल्कि अब युद्ध का एक नया कारण सामने आ रहा है| यह माना जा रहा है कि अब पानी दुनिया के सामने सबसे बड़े संकट के रूप में उबरेगा| लेकिन अभी तक इस बात पर संशय बना हुआ है| नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि लगातार कम हो रहे जलस्तर के कारण वर्ष 2030 भूजल की कमी एक सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभरेगी|

घटते भूजल स्तर को लेकर भूवैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों की चिंता के बाद एक रिपोर्ट तैयार की गई| जिसमें बताया गया कि देश में भारी जल संकट होगा| इसके बाद एनजीटी द्वारा इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश बनाने के लिए अल्टीमेटम दिया है| गौरतलब है कि इसके पहले 1996 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी जल संकट से उबरने का निर्देश जारी किया गया था, लेकिन अभी भी देश इस समस्या से उबरा नहीं है|

नीति आयोग की रिपोर्ट में भूजल के घटते स्तर को सबसे बड़ा संकट बताया गया है| रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2030 तक यह सबसे बड़े संकट के तौर पर उभरेगा और सरकार इसको लेकर गंभीर नहीं है| इस रिपोर्ट पर पर्यावरणविद् तोंगड़ कहते हैं, ‘इसमें प्रशासन की कमी है, कहीं कोई नियम-कायदा नहीं है|

गौरतलब है कि वर्ष 1914 से 1918 तक पहला विश्व युद्ध  मुख्य रूप से  यूरोप में लड़ा गया था| यह महायुद्ध यूरोप एशिया  तथा अफ़्रीका तीन महाद्वीपों के बीच समुद्र,  धरती और आकाश में लड़ा गया था| यह लगभग 52 महीने तक चला था| क़रीब आधी दुनिया हिंसा की चपेट में चली गई और इस दौरान अंदाज़न एक करोड़ लोगों की जान गई और इससे दोगुने घायल हो गए। इसके अलावा बीमारियों और कुपोषण जैसी घटनाओं से भी लाखों लोग मरे| वहीं 1939 से 1945 तक चलने वाले द्वितीय विश्व युद्ध में राष्ट्रों के लगभग 10 करोड़ सैनिकों ने हिस्सा लिया, तथा यह मानव इतिहास का सबसे ज़्यादा घातक युद्ध साबित हुआ| इस महायुद्ध में 5 से 7 करोड़ व्यक्तियों की जानें गईं|

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