भीमा कोरेगांव: दाखिल करना होगा लिखित नोट

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भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार 5 आरोपियों पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते इस केस पर अपना फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि फैसला सुनाए जाने तक पांचों आरोपी नज़रबंद रहेंगे। कोर्ट ने कहा, सभी पक्ष अपनी लिखित दलीलें सोमवार तक कोर्ट में जमा कर दें। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई में विचारकों की तरफ से वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर पेश हुए। ग्रोवर ने दलील दी कि पुलिस जिस पत्र का जिक्र कर रही है, वह हिंदी में लिखा गया है। ग्रोवर ने कहा कि पुलिस कह रही है कि रोना विल्सन और सुधा भारद्वाज ने चिट्ठी लिखी। पत्र से साफ जाहिर होता है कि किसी मराठी जानने वाले ने हिंदी में चिट्ठी लिखी है। यह मामला पूरी तरह फर्जी है।

इससे पहले महाराष्ट्र सरकार की ओर से एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ मामले में पुख्ता सबूत हैं। शुरुआती जांच में सबूत सामने आने पर 6 जून को एक गिरफ्तारी हुई, जिसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। कोर्ट से सर्च वारंट मांगा था। जांच की निगरानी डीसीपी व सीनियर अधिकारी ने की थी। जब्त किए गए कंप्यूटर, लैपटॉप और पेन ड्राइव को फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा गया| पूरी सर्च की वीडियोग्राफी भी बनाई गई। ये लोग सीपीआई माओवादी संगठन से जुड़े हुए हैं।

वहीं न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड ने कहा, “यदि किसी को प्रभावित क्षेत्र में लोगों का हाल जानने भेजा जाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह प्रतिबंधित संगठन का सदस्य है। उन्होंने कहा कि सरकार को विरोध, तोड़फोड़ और गड़बड़ी फैलाने वालों के बीच के अंतर को समझना होगा|

क्या है भीमा कोरेगांव गिरफ्तारी केस?

भीमा कोरेगांव हिंसा की साज़िश रचने और नक्सलवादियों से संबंध रखने के आरोप में पुणे पुलिस ने 28 अगस्त को देश के अलग-अलग हिस्सों से वामपंथी विचारक गौतम नवलखा, वारवारा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, रोना विल्सन और वरनोन गोंजाल्विस को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इन गिरफ्तारियों पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई तक हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों को घर में नज़रबंद रखने के आदेश दिए।

भीमा कोरेगांव केस: सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला, जानिए

अपनी गिरफ्तारी पर रोमिला थापर ने दिया बयान

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