ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट में 2 पत्रकारों को सज़ा

0

देश में दिनों दिन हिंसा और अपराध बढ़ते जा रहे है। रोहिंग्या मुसलमानों के साथ हुई हिंसा के बाद से म्यांमार का रखाइन प्रांत सुर्खियों में बना हुआ है। जिस पर राजनीति भी काफी गरमा गई है। हिंसा इतनी बढ़ गई की रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार छोड़कर जाने लगे। इसी हिंसा के दौरान मीडिया कवरेज कर रहे दो पत्रकारों को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (शासकीय गोपनीयता अधिनियम) के तहत दोषी पाया गया है और उन्हें सात साल जेल की सज़ा सुनाई गई है। रॉयटर्स न्यूज एजेंसी के लिए काम करने वाले ‘वा लोन और क्याव सोय’ दोनों पत्रकार दोषी पाए गए है।

जज ये लवीन ने अदालत में कहा कि, उन्होंने गोपनीयता कानून के तहत अपराध किया है, दोनों को सात-सात साल जेल की सजा सुनायी जा रही है।” म्यांमार में सेना की तरफ से रोहिंग्या शरणार्थियों पर हो रही हिंसा की रिपोर्टिंगके दौरान रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी के दो रिपोर्टर दिसंबर से जेल में हैं। वाले वा लोन और क्याव सोय दोनों पत्रकारों को 12 दिसंबर 2017 की रात को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों पत्रकारो ने पुलिसकर्मियों से मुलाक़ात की थी और इन पुलिसकर्मियों ने उन्हें गोपनीय दस्तावेज सौंपे थे। पिछले वर्ष दिसंबर से ही ये दोनों पत्रकार बिना किसी जमानत के जेल में सजा काट रहे हैं।  सज़ा सुनने के बाद वा लोन ने कहा कि “मुझे डर नहीं है।  मैंने कुछ गलत नहीं किया।  मुझे न्याय, लोकतंत्र और आजादी पर पूरा विश्वास है। अपने पत्रकार को सजा दिये जाने के बाद न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी निंदा की है और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है।  रॉयटर्स ने कहा, ”आज का दिन म्यांमार और प्रेस के लिए निराशाजनक है।” मामले के  पर संयुक्त राष्ट्र ने दोनों ही पत्रकारों को जल्द से जल्द छोड़ने की मांग की है।

Share.