सुप्रीम कोर्ट  : 157 साल पुराना कानून खत्म, विवाहेत्तर संबंध अपराध नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बहुत बड़ा फैसला सुनाते हुए 157 साल पुराना कानून खत्म कर दिया है| गुरुवार यानी 27 सितंबर को कोर्ट ने कहा कि महिला की गरिमा सबसे ऊपर है| पति उसका मालिक नहीं है| आईपीसी की धारा 497 (व्यभिचार) पुरुष को मनमानी का  अधिकार देने वाली है इसलिए यह असंवैधानिक हुई| एडल्ट्री (व्यभिचार) अपराध नहीं हो सकता| शीर्ष न्यायालय ने कहा कि जो कानून महिला की गरिमा के विपरीत हो या भेदभाव करता हो, उसे संविधान में जगह नहीं दी जानी चाहिए|

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 9 अगस्त को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था| कोर्ट ने अनुसार, किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं हो सकता है| चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने कहा कि चीन, जापान और ब्राजील में भी यह अपराध नहीं है| यदि इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया तो इसका मतलब दुखी लोगों को सज़ा देना होगा| बहुत सारे देशों ने व्यभिचार को रद्द कर दिया| महिला को समाज की चाहत के हिसाब से सोचने को नहीं कहा जा सकता है|

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस एएम खानविलकर ने मिलकर इस मामले पर फैसला सुनाया| उन्होंने कहा कि एडल्ट्री तलाक का आधार बन सकता है और इसके कारण खुदकुशी पर उकसाने का केस भी चल सकता है| सुप्रीम कोर्ट ने इस ऐतिहासिक फैसले में महिलाओं की इच्छा, अधिकार और सम्मान को सर्वोच्च बताया और कहा कि उन्हें सेक्सुअल चॉइस से वंचित नहीं किया जा सकता है|

क्या है व्यभिचार कानून

इस कानून के अनुसार, कोई शादीशुदा पुरुष किसी अन्य शादीशुदा महिला के साथ आपसी सहमति से संबंध बनाता है तो उस महिला का पति एडल्ट्री के नाम पर उस पुरुष के खिलाफ केस दर्ज करवा सकता है, लेकिन वह अपनी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता है, न ही विवाहेतर संबंध में लिप्त पुरुष की पत्नी इस दूसरी महिला के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती है| संबंध में लिप्त पुरुष के खिलाफ केवल साथी महिला का पति ही शिकायत कर सकता है, कोई अन्य रिश्तेदार नहीं|

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