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कुंभ मेला 2019 : यह 14 अखाड़े होंगे शामिल

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प्रयागराज में कुंभ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कुंभ विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में से एक है। कुंभ मेले में देश भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु, आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। हर 12 वर्ष के अंतराल के बाद कुंभ का मेला आयोजित होता है। कुंभ मेला 4 पावन नदियों के तट पर लगता है। इन चार शहरों में, हरिद्वार में गंगा, उज्जैन की शिप्रा, नासिक की गोदावरी और प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर कुंभ मेला लगता है (Kumbh Mela 2019 Akhara List)।

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कुंभ मेले में अखाड़ों का एक अपना महत्व होता है। अखाड़ा साधू-संतों का वह दल होता है, जो शास्त्र के साथ-साथ शस्त्र विद्या में भी पारंगत होता है। कुम्भ मेले में जब नाचते-गाते और ढोल नगाड़ों के साथ धूमधाम से अखाड़े पहुँचते हैं, तो उसे  पेशवाई कहा जाता है। मान्यता है कि आठवीं सदी में शंकराचार्य ने 13 अखाड़े निर्मित किए थे, लेकिन इस बार एक और अखाडा इसमें शामिल हो गया है। इस अखाड़े के जुड़ने से अब कुंभ में 14 अखाड़ों की पेशवाई होगी।

कौन से हैं 14 अखाड़े (Kumbh Mela 2019 Akhara List)

  1. अटल अखाड़ा- इस अखाड़े के ईष्ट देव भगवान गणेश हैं। इस अखाड़े में केवल ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य दीक्षा ले सकते हैं। अटल अखाड़ा सबसे प्राचीन अखाड़ा माना जाता है।
  2. अवाहन अखाड़ा- इस अखाड़े के ईष्ट देव हैं श्री दत्तात्रेय और श्री गजानन महाराज। काशी इस अखाड़े का केंद्र है।
  3. निरंजनी अखाड़ा- इस अखाड़े के ईष्ट देव भगवान शंकर के पुत्र कार्तिक हैं। सभी अखाड़ों में यह अखाड़ा सबसे ज्यादा शिक्षित है। करीब 50 महामंडलेश्वर वाले इस अखाड़े की स्थापना 826 ई. में हुई थी।
  4. पंचाग्नि अखाड़ा- केवल ब्रह्मचारी ब्राह्मण को दीक्षा देने वाला अखाड़ा पंचाग्नि अखाड़ा है। इस अखाड़े की ईष्ट देव माता गायत्री हैं।
  5. महानिर्वाण अखाड़ा- कपिल महामुनि को अपना इष्ट देव मानाने वाले इस अखाड़े के पास ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा का जिम्‍मा है। 671 ई. में इसे स्थापित किया गया था।
  6. आनंद अखाड़ा-  855 ई. में स्थापित इस अखाड़े में आचार्य का पद ही प्रमुख होता है। इस अखाड़े का केंद्र वाराणसी है।
  7. निर्मोही अखाड़ा- वैष्णव संप्रदाय के सबसे ज्यादा अखाड़े इसी में शामिल हैं। रामानंदाचार्य ने इस अखाड़े की स्थापना 1720 में की थी। कई शहरों में इस अखाड़े के मंदिर भी हैं।
  8. बड़ा उदासीन पंचायती अखाड़ा- इस अखाड़े की शुरुआत 1910 में हुई थी। श्रीचंद्रआचार्य उदासीन ने अखाड़े की स्थापना की थी। इस अखाड़े उद्देश्‍य केवल मानव सेवा करना है।
  9. नया उदासीन अखाड़ा- मान्यता है कि इस अखाड़े को बड़ा उदासीन अखाड़े के साधुओं ने 1710 ई. में बनाया था।
  10. निर्मल अखाड़ा- श्रीदुर्गासिंह महाराज ने इस अखाड़े की स्थापना की थी, जिनके ईष्ट देव पुस्तक श्री गुरुग्रंथ साहिब हैं। ऐसा माना जाता है कि इस अखाड़े के लोगों को अन्य अखाड़ों की तरह धूम्रपान करने की इजाजत नहीं है।
  11. वैष्णव अखाड़ा- इस अखाड़े की स्थापना मध्यमुरारी द्वारा की गई थी।
  12. नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा- इस अखाड़े की स्थापना 866 ईसवी में हुई, जिसके संस्थापक पीर शिवनाथ जी हैं।
  13. जूना अखाड़ा- रुद्रावतार दत्तात्रेय इस अखाड़े के ईष्ट देव हैं। इस अखाड़े का आश्रम हरिद्वार में स्थित है। इस अखाड़े के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज हैं।
  14. किन्नर अखाड़ा- कुंभ में अब तक पेशवाई करने वाले 13 अखाड़े ही थे, लेकिन इस बार कुंभ में किन्नर अखाड़ा भी शामिल हो चुका है। इस अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी हैं।इस अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी हैं।

(प्रभात)

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