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कोठारी की नौटंकी फिर शुरू

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कहते हैं जब कोई बड़ा अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाता है, तब उसे यह महसूस होता है कि अभी तक जितना महत्व और सम्मान मिल रहा था, दरअसल वह उसको नहीं बल्कि उसके पद को मिल रहा था। जब कहीं मिलने पर कनिष्ठ कर्मचारी, जो कल तक जी सर, जी सर कहकर आगे पीछे चलते थे, अचानक नजरें फेरकर निकल लेते हैं, तब अधिकारी को जीवन का यथार्थ समझ आ जाता है। अगर अधिकारी समझदार हो, तब तो वह इन बदली परिस्थितियों को स्वीकार कर लेता है, लेकिन अगर वह फिर से उसी प्रतिष्ठा और गरिमा को पाने का प्रयास शुरू करता है तो वह अनजाने में बची हुई इज्जत भी दांव पर लगा देता है।

ऐसा ही राजनेताओं के साथ भी है। एक उम्र के बाद जब कार्यकर्ता और शीर्ष नेतृत्व उपेक्षा करना शुरू कर दे तो सम्मान के साथ मार्गदर्शक बन जाना ही श्रेष्ठ विकल्प होता है। कुछ नेता इतनी साधारण सी बात भी समझ नहीं पाते और उद्विग्न हो जाते हैं। रतलाम के पूर्व विधायक हिम्मत कोठारी भी इसी उद्विग्नता के शिकार हैं। गाहे-बगाहे वे जनता के बीच पहुंचकर खुद को उनका सबसे बड़ा हितैषी बताने की भूल कर बैठते हैं क्योंकि वे अभी तक यह हजम नहीं कर पा रहे हैं कि इसी जनता ने उनको रिकॉर्ड मतों से पटखनी दी है। उनके खुद के इलाके पैलेस रोड और डालू मोदी बाजार में भी उनको कोई पूछने वाला नहीं बचा है। जिस चौराहे पर ‘सेठ’ के आने की आहट मात्र से खलबली मच जाती थी, आज वहां से ‘सेठ’ अकेले कब गुजर जाते हैं, किसी को खबर भी नहीं लगती है।

शहर के युवा आज पढ़ाई के लिए, रोजगार के लिए दूसरे शहरों में भटक रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी से आप बच नहीं सकते क्योंकि आपकी सोच ही नहीं थी कि शहर में कोई कॉलेज खुले, कोई कंपनी आए, कोई कारखाना आए। जुआरी, सटोरिये, गुंडों और प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों के अलावा शहर में पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा भी बड़ी तादाद में हैं, यह बात आपको शायद समझ ही नहीं आई। खुद की ईमानदारी का ढोल बजाते-बजाते शहर को गड्ढे में डालने वालों में शामिल नेता अब बाजना बस स्टैंड पहुंचकर नई नौटंकी शुरू करना चाह रहे हैं।

बात सिर्फ इतनी सी है कि शहर में बाजना बस स्टैंड से निकल रहा फोरलेन 104 फ़ीट का बन रहा है और क्षेत्रीय रहवासी मांग कर रहे हैं कि यह सिर्फ 80 फ़ीट का बने ताकि उनकी दुकानें न टूटे। फोरलेन 80 फ़ीट का बनेगा या फिर 104 फ़ीट का, यह तय करना प्रशासन का काम है न कि नेताओं का। यातायात का दबाव और जनसंख्या वृद्धि देखते हुए सड़कें जितनी चौड़ी बने, उतना ही अच्छा है और फिर न आप जनप्रतिनिधि हैं न ही प्रशासनिक अधिकारी, फिर क्यों आप लोगों के गुस्से को भड़का रहे हैं? आपके विधायक रहते आपके हर कार्यकर्ता का प्रशासन के कामों में हस्तक्षेप भी शहर के विकास की एक बड़ी बाधा था। शहर के युवा आपसे हाथ जोड़कर निवेदन करते हैं कि एक अरसे बाद रतलाम विकास की राह पर चल पड़ा है। कृपया इसमें बाधा पहुंचाने की कोशिश न करें। आपको रतलाम ने विधायक के अनेक कार्यकाल दिए, लेकिन आप शहर का विकास कराने में बुरी तरह विफल रहे। यह बात आप शायद न माने, लेकिन जनता यह बात भली-भांति जानती है।

बदली हुई परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए आपको सक्रिय राजनीति से दूर रहकर किसी अन्य माध्यम से समाज की सेवा करनी चाहिए। वर्तमान विधायक के पास शहर के विकास की कई योजनाएं है, उन्हें अपना काम करने दीजिए और यह जान लीजिए कि आपका समय जा चुका है।

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