जब मोक्ष के लिए सैकड़ों लोगों ने की आत्महत्या

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देश की राजधानी दिल्ली में दिल दहला देने वाली घटना से अभी भी लोग सकते में हैं| बुराड़ी में एक ही घर से 11 लोगों के शव मिलने की गुत्थी अभी भी नहीं सुलझी है| वहीं जांचकर्ताओं को घर से दो रजिस्टर और अन्य कई सबूत मिले हैं|  मौके पर मौजूद ज्यादातर सबूत सामूहिक आत्महत्या की तरफ इशारा कर रहे हैं| कहा जा रहा है कि मोक्ष की चाह में सभी ने मौत को गले लगा लिया, फिलहाल पुलिस इस मामले की छानबीन में जुटी है|

आपको यह जानकर हैरानी होगी  कि इससे पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जब लोगों ने मोक्ष की चाह में मौत को गले लगाया हो| आइये जानते हैं उन घटनाओं के बारे में –

पीपुल्स टेंपल

18 नवंबर, 1978 को एक साथ सैकड़ों लोगों ने आत्महत्या कर ली थी| मृतकों में सैकड़ों बच्चे भी शामिल थे| दरअसल, पीपुल्स टेंपल पंथ के कई अनुयायियों ने एक साथ आत्महत्या कर ली थी, जिनमें 276 बच्चे शामिल थे| इन सभी लोगों ने एक साथ सायनाइड खाकर जान दी थी| पंथ मुखिया जिम जोन्स ने मरने से पहले कहा था, “हम आत्महत्या नहीं कर रहे हैं, हम इस अमानवीय दुनिया के हालातों के खिलाफ एक क्रांतिकारी आत्महत्या का प्रदर्शन कर रहे हैं|”

सोलर टेंपल

वर्ष 1994 से 1997 के बीच सोलर टेंपल पंथ के कई अनुयायियों ने भी सामूहिक आत्महत्या की थी| इस अवधि के बीच लगभग 74 लोगों ने आत्महत्या की थी| कई लोगों ने मरने से पहले लिखा कि उनकी मौत इस दुनिया के पाखंड और दमन से बचाएगी| मरने के बाद वे प्रभु की दुनिया में पहुंच जाएंगे और रात को दिखने वाले सबसे चमकीले सितारे सीरियस पर रहेंगे| ये सभी आत्महत्याएं एक ख़ास तारीख के आसपास ही की गई|

हैवेंस गेट

वर्ष 1997 में 24 मार्च से 27 मार्च के बीच 39 लोगों ने सामूहिक आत्महत्या कर ली थी| ये लोग हैवेंस गेट के अनुयायी थे| उनका मानना था कि मरने के बाद शरीर यहीं रह जाएगा और उनकी आत्मा एक विमान में बैठकर जन्नत चली जाएगी| इस आत्महत्या के बाद दो लोगों को बचा लिया था, जिनमें से एक ने 1998 में आत्महत्या कर ली थी|

आदम हाउस

बांग्लादेश में ‘आदम हाउस’ नामक घर में रहने वाले लोगों ने वर्ष 2007 में ट्रेन के नीचे लेटकर सामूहिक आत्महत्या कर ली थी| इनके घर से मिली डायरी के अनुसार परिवार से सभी लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन लोग उन्हें इस वजह से परेशान करते थे| उन्होंने डायरी में लिखा था कि वे आदम और हव्वा की तरह पवित्र जिंदगी चाहते थे, लेकिन बिना किसी रोकटोक और परहेज के|

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