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5 Mysteries of Indian Temples : प्राचीन धार्मिक स्थलों के 5 अनसुने रहस्यमयी किस्से

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भारत देश किस्से और कहानियों का देश है। हम सभी ने अपने बड़े-बुजर्गों से हर काल और युग की अनगिनत कहानियां सुनी है। इतना ही नहीं हमारे बड़े-बुजर्गों कई बार हमे कई रहस्यमयी किस्से और कहानियां भी सुनाई हैं। ये रहस्यमयी किस्से आज भी हम सभी के ज़हन में कहीं न कहीं जिन्दा हैं (5 Mysteries of Indian Temples)। हालांकि हमे इन पर विशवास नहीं होता लेकिन आज भी कई धार्मिक स्थलों से जुड़ी कहानियां हमारे देश में हैं जिन्हें जानकार आप भी हैरानी में पड़ जाएंगे। आज हम आपको ऐसे ही कुछ किस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं।

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न काटने वाले बिच्छू

बिच्छू का नाम सुनते ही हमारे दिलो-दिमाग में जहरीला डंक वाला बिच्छू आ जाता है। लेकिन आपको बात दें कि उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 13वीं सदी के सूफी संत सैयद हुसैन शर्फुद्दीन शाह विलायत नकवी की एक मज़ार स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि वे उत्तर भारत के पहले उर्दू कवि थे। उनकी मजार पर कई जहरीले बिच्छू रहते हैं (5 Mysteries of Indian Temples)। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन बिच्छुओं ने आज तक किसी भी अनुयायी या भक्त को नुकसान नहीं पहुंचाया है। इतना ही नहीं उन बिच्छू को कोई भी चाहे तो अपने घर भी ले जा सकता है लेकिन उसके लिए समय निर्धारित होता है। अगर निर्धारित समय पर बिच्छू को पुनः मज़ार पर नहीं छोड़ा गया तो वह हमला कर देता है।

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हम्पी के संगीतमय खम्बे

कर्नाटक राज्य के हम्पी में भगवान विष्णु के अवतार विठ्ठल जी का बेहद विशाल और बेहद प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में 56 खम्बे हैं जिन्हें सारेगामा पिलर्स कहा जाता है। इन्हें यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इन खम्बों पर हल्की सी चोट करने पर इनसे सात स्वर निकलते हैं। सात ध्वनियां निकलने की वजह से इन्हें यह नाम दिया गया। यहां दो खम्बे कटे हुए भी दिखाई देते हैं क्योंकि अंग्रेजों ने इस ध्वनि की जांच के लिए दो खम्बों को काटकर देखा था। लेकिन ये खम्बे उन्हें खोखले दिखाई दिए।

जादुई पत्थर

पुणे में हज़रत कमर अली दरवेश की बेहद मशहूर दरगाह मौजूद है। इस दरगाह पर दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। यहां एक करिश्माई पत्थर रखा हुआ है जिसे केवल 11 लोग मिलकर ही उठा सकते हैं। अगर 11 से ज्यादा या फिर कम लोग इसे उठाने की कोशिश करते हैं तो यह हिलता तक नहीं है। वहीं जब इसे 11 लोग मिलकर उठाते हैं तो इसका जरा भी वजन नहीं लगता। इसके अलावा यहां पर जलने वाला चराग 24 घंटे जलता रहता है।

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नंदी का बढ़ता आकार

भगवान भोलेनाथ के कई प्रसिद्ध मंदिर पूरे देश में मौजूद हैं लेकिन आंध्र प्रदेश के कुरनूल में शिव शंकर का एक बेहद ही रहस्यमयी मंदिर है। इस मंदिर में स्थित नंदी का आकर प्रतिवर्ष बढ़ रहा है। यह मंदिर यगंती मंदिर है।

शिवभक्त कोबरा

तमिलनाडु के थेप्परुमनल्लुर भी एक करिश्माई शिव मंदिर स्थित है जहां साल 2010 में प्रतिदिन होने वाली आरती के दौरान एक चमत्कार देखने को मिला। दरअसल आरती के दौरान पुजारी ने देखा कि एक कोबरा पेड़ से पत्तियां तोड़कर शिवलिंग पर चढ़ा रहा है। कोबरा कई बार ऐसा करता रहा जिसके बाद यह किस्सा चर्चित हो गया। लोगों का कहना है उन्होंने कई बार उसे देखा है और वह भोलेनाथ को पत्तियां चढ़ाता है।

Prabhat Jain

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