इस एयर होस्टेस को हर कोई कर रहा सलाम

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कहते हैं परियां सिर्फ  कल्पना मात्र है| वास्तविकता से उनका कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन एक तरह से देखा जाए तो हर वह नारी परी के समान है, जो जीवन  बहादुरी से जीती है और अपनी फ़िक्र न करते हुए जरूरत पड़ने पर अपनी जान को जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाती है| हाल ही में ऐसी ही एक बहादुरी की घटना सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है, जिसमें एक एयरहोस्टेस ने अपनी परवाह किए बिना एक नन्ही जान की जिंदगी बचाई|

घटना मुंबई एयरपोर्ट की है, जहां अचानक महिला की गोद से 10 माह का बच्चा फिसल गया| एयर होस्टेस मितांशी वैद्य की नजर तुरंत उस बच्चे पर पड़ी और उसने फुर्ती दिखाते हुए लंबी छलांग लगाकर बच्चे को फर्श पर गिरने से पहले ही लपक लिया| मितांशी की इस बहादुरी को वहां मौजूद लोगों ने देखा, जिसके बाद सभी ने उनकी इस बहादुरी के लिए तालियां बजाई| मितांशी के स्टाफ वालों ने भी उनके इस कारनामे की सराहना की|

Hats off Mitanshi Vaidya You have established that Call of Duty is supreme. When society tends to refuse both rewards for do gooders and punishments for wrong doing; let me congratulate you for your exemplary action.

Indian Aviation Career द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 29 अप्रैल 2018

इस घटना में मितांशी की नाक पर चोट आई, लेकिन उन्होंने बच्चे की जिंदगी बचाकर एक मिसाल कायम कर दी| यह घटना करीब एक माह पुरानी है, लेकिन यह मामला हाल ही में सुर्खियों में आया है| एक कंपनी में एमडी बच्चे की मां ने जेट एयरवेज को पत्र लिखकर शुक्रिया कहते हुए एयर होस्टेस को एंजल करार दिया|

बच्चे की मां ने कहा, 14 वर्ष बाद पैदा हुए बच्चे से मेरी सूनी गोद भरी थी| यदि मितांशी छलांग लगाकर न बचाती तो शायद बच्चा जिंदा न बचता| मां ने आगे कहा, जब हमने एयर होस्टेस से मोबाइल नंबर मांगा तो उस मासूम लड़की ने कंपनी पॉलिसी कहकर नंबर देने में असमर्थता जताई| हमने उसे बहुत कुछ ऑफर किया, लेकिन उस लड़की ने सिर्फ मुस्कुराभर दिया|

बच्चे की मां गुलाफा शेख के पत्र के जवाब में जेट एयरवेज ने कहा, “चेहरे पर चोट से एयर होस्टेस की नौकरी खतरे में पड़ सकती थी, लेकिन उसने परवाह नहीं की| हमें गर्व है कि मितांशी वैद्य जैसी एयर होस्टेस हमारे साथ काम कर रही हैं|” वाकई मितांशी ने जो काम किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है|

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