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राफेल को लेकर इस गाँव के लोग परेशान

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राफेल (Rafale) पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच लड़ाई जारी है| कांग्रेस (Congress) इस डील में भारी घोटाले का आरोप लगा रही है तो मोदी सरकार (Modi Government)  इससे इनकार कर रही है| राफेल  सौदे की जांच की मांग से जुड़ीं याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) खारिज कर चुका है| जहां देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा राफेल को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों से परेशान है तो वहीं एक छोटे से गाँव (Chattisgarh Village Rafel ) के सभी ग्रामीण भी ‘राफेल’ के कारण परेशान हैं| आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसी क्या बात है, जो छोटे से गाँव के लोग ‘राफेल’ से प्रभावित हो रहे हैं|

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दरअसल, नेशनल हाईवे-53 पर महासमुंद से करीब 135 किमी दूर 150 परिवारों का एक गांव (Chattisgarh Village Rafel ) है। छत्तीसगढ़ के इस छोटे-से गांव में न तो राफेल की फैक्ट्री लगनी है और न ही राफेल से इसे कोई फायदा मिलने वाला है, लेकिन फिर भी चुनाव में सबसे ज्यादा उछाले जा रहे मुद्दों में एक राफेल इस गांव की समस्या बन गया है।

दरअसल, इस गाँव का नाम ही राफेल (Chattisgarh Village Rafel ) है| गांव का नाम राफेल होने से गांव वाले आसपास के इलाकों में हंसी का पात्र बने हुए हैं। गांव के लोग दूसरे गांव में जाते हैं तो उन्हें कभी जिज्ञासा भरे ढेरों सवालों से जूझना पड़ता है तो कभी चुटीले शब्द भी सुनने पड़ते हैं कि कांग्रेस की सरकार आएगी तो गांववालों की जांच करवाई जाएगी।

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Chattisgarh Village Rafel :

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गांव का नाम राफेल (Chattisgarh Village Rafel ) कैसे पड़ा, यह गांव के बड़े-बुजुर्ग भी नहीं जानते। उनका कहना है कि पहले रायपुर जिला था, फिर 1998 में महासमुंद जिला बना, जिसमें 21 साल से यह गांव है। गांव में 35 साल से रह रहीं सुकांति बाग कहती हैं कि गांव की इतनी चर्चा पहले कभी नहीं हुई। महिला पंच सफेद राणा से जब पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट में फिर मामले की सुनवाई होगी तो वे बोलीं कि ये सब हम नहीं समझते, पता नहीं क्यों सब गांव के पीछे पड़े हैं।

बुजुर्गों का कहना है कि चर्चा में आने से उन्हें क्या मिल गया ? कभी प्रधानमंत्री या कांग्रेस अध्यक्ष आते तो उनके गांव को भी फायदा मिलता। गांव का नाम भले चर्चित हो, लेकिन राजनीति को यह आकर्षित नहीं कर पाया है। सोमवार को प्रचार का आखिरी दिन है, पर गांव वाले बताते हैं कि कोई भी उम्मीदवार यहां प्रचार के लिए नहीं आया। गांव वाले कहते हैं कि प्रधानमंत्री जो भी बने, हमें तो सिंचाई की सुविधा चाहिए। अभी बारिश के भरोसे खेती होती है।

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