वो आईएएस-आईपीएस अफसर, जिन्होंने थामा राजनीति का हाथ

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राजनीति ऐसी चीज है, यह हर इंसान के बस की बात नहीं होती। किसी पार्टी में छोटे से पद के लिए कार्यकर्ता सालों-साल मेहनत करते थे। तब जाकर कोई पद मिलता है। राजनीति में पद मिलना मतलब पैसा और पॉवर दोनों आपकी मुट्टी में होता है। पत्रकारों से लेकर कई अधिकारी अपने काम को छोड़कर राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं। आज हम आपको उन आईएएस-आईपीएस अफसर के बारे में बतायेंगे, जिन्होंने ब्यूरोक्रेसी छोड़ राजनीति के रणभूमि में उतरने का फैसला किया।

– यशवंत सिन्हा

भाजपा के दिग्गज नेता यशवंत सिन्हा 1960 बैच के आईएएस अफसर रह चुके हैं। उन्होंने 1984 मे पद से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह विदेश मंत्री और वित्त मंत्री रही थे।

– हरदीप सिंह पुरी

भारतीय विदेश सेवा यानी आईएफएस रह चुके हरदीप पुरी केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ वर्तमान केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। वह उत्तरप्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं।

– किरण बेदी

आईपीएस किरण बेदी ने अन्ना आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने अपनी राजनीतिक कदम भाजपा से शुरू किया। भाजपा ने 2015 के चुनाव में किरण को मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी बनाया था। लेकिन वह हार गई थी। फिलहाल किरण पुदुच्चेरी की उपराज्यपाल हैं।

– केजे अल्फोंस

केजे अल्फोंस ने 2011 में आईएएस अधिकारी पद छोड़ दिया। बाद में भाजपा में शामिल हो गए। अब वह केंद्र सरकार में पर्यटन राज्य मंत्री हैं।

– सत्यपाल सिंह

मुंबई के पुलिस कमिश्नर रह चुके सत्यपाल सिंह 1980 के आईपीएस अफसर हैं। 2014 में भाजपा में शामिल हो गए। अब केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री हैं।

– राज कुमार सिंह

बिहार के आरा से सांसद आरके सिंह आईएएस रह चुके हैं। वह 2013 में भाजपा में शामिल हुए और 2014 का लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।

 – अजीत जोगी

अजीत जोगी पहले भारतीय पुलिस और फिर भारतीय प्रशासनिक में अपनी सेवाएं दी। 1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ बना तो राज्य का पहला मुख्यमंत्री अजीत जोगी को बनाया गया।

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