स्वतंत्रता दिवस पर दोस्तों को भेजें शानदार शायरी

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आज देशभर में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा है| आज से 71 वर्ष पहले भारत अंग्रेजों के चंगुल से आज़ाद हुआ था| इस आज़ादी के जश्न में हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है| इस दौरान हम भारत के उन क्रांतिकारियों को याद करते हैं, जिन्होंने देश को आज़ाद करने के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए| स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी एक-दूसरे को बधाइयां देते हैं और देशभक्ति के संदेश भेजते हैं| 72वें स्वतंत्रता दिवस के इस ख़ास मौके पर हम आपके लिए देशभक्ति पर आधरित संदेश, शायरी और कविता लेकर आए हैं, जिन्हें आप अपने मित्र और परिजन को भेज सकते हैं|

#1. मैं भारत वर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूं,
यहां कि सुनहरी मिट्टी का गुणगान करता हूं,
मुझे चिंता नहीं है, स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूं|

#2. कुछ नशा तिरंगे की आन का है,
कुछ नशा मातृभूमि के मान का है,
हम लहराएंगे हर जगह इस तिरंगे को,
हम लहराएंगे हर जगह इस तिरंगे को,
ऐसा नशा ही कुछ हिंदुस्तान की शान का है||

#3.  इतनी सी बात हवाओं को बताए रखना,
इतनी सी बात हवाओं को बताए रखना,
रोशनी होगी चिरागों को जलाए रखना,
लहू लेकर की है, जिसकी हिफ़ाज़त हमने,
ऐसे तिरंगे को दिल में हमेशा बसाए रखना|

#4.  आज़ादी की कभी शाम नहीं होने देंगे,
शहीदों की क़ुरबानी बदनाम नहीं होने देंगे,
बची हो जो एक बूंद भी लहू की,
बची हो जो एक बूंद भी लहू की,
तब तक भारत माता का आंचल नीलाम नहीं होने देंगे|

#5.  वतन हमारा मिसाल है मोहब्बत की,
तोड़ता है दीवारें नफ़रत की,
ये मेरी खुशनसीबी है, जो मिली ज़िंदगी इस चमन में…
और भुला न सके कोई भी इसकी ख़ुशबू सातों जनम में…

#6.  मेरे देश का मान हमेशा यूं ही बनाए रखूंगा,
दिल तो क्या जान भी इस पर निछावर कर दूंगा,
अगर मिले एक भी मौक़ा देश के काम आने का
तो बिना कफ़न के ही देश के लिए सो जाऊंगा…

#7. संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे,
हिन्दू-मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे
हम मिलजुल के रहें ऐसे कि
मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे|
#8. चलो फिर से खुद को जगाते हैं,
अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं,
सुनहरा रंग है गणतंत्र स्वतंत्रता का
शहीदों के लहू से, ऐसे शहीदों को हम सब सिर झुकाते हैं…

#9. ज़माने में मिलते हैं आशिक कई, ज़माने में मिलते हैं आशिक कई
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता
नोटों में लिपटकर सोने में सिमटकर, नोटों में लिपट कर सोने में सिमटकर मरे हैं कई
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता|

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