पुजारी ने करवाया दलित को मंदिर में प्रवेश

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भारत द्वारा इतनी तरक्की किए जाने के बाद भी देश में अब भी इसे कई क्षेत्र हैं, जहां अस्पृश्यता या छुआछूत विद्यमान है| कई मंदिरों में आज भी निम्न वर्ग या दलितों को प्रवेश नहीं दिया जाता है| कई स्थानों पर दलित पशुओं से भी बदतर ज़िन्दगी जीने को बाध्य है| इन सभी रुढ़ियों को तोड़ते हुए और पुरानी परम्पराओं का प्रतिकार कर एक मंदिर के पुजारी ने भाईचारे की मिसाल कायम की है| उन्होंने 3 हजार साल पुरानी एक प्रथा को पुनर्जीवित कर यह काम किया है|

गौरतलब है कि हैदराबाद के चिल्‍कुर बालाजी मंदिर के पुजारी सीएस रंगराजन ने एक दलित को कंधे पर उठाकर मंदिर में प्रवेश करवाया| दलित युवक आदित्‍य पारश्री को पुजारी मंदिर के गर्भगृह के अंदर भी ले गए| इस पुरानी प्रथा को तमिलनाडु में मुनिवाहन सेवा के रूप में जाना जाता है| आदित्‍य ने मंदिर के अंदर पूजा भी की|

आदित्‍य पारश्री के अनुसार एक दलित होने के नाते मेरे परिवार के साथ हमेशा बुरा बर्ताव हुआ है और भेदभाव किया गया है| ऐसे में मैं आशा करता हूं कि यह कोशिश बदलाव लाएगी और लोगों की सोच बदलेगी| वहीं पुजारी का कहना है कि दलितों के साथ भेदभाव और उनके शोषण को खत्‍म करने की कोशिश की गई है|

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