प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अब स्नातक में 50% अंक लाना ज़रूरी नहीं

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अभी तक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए बीएड के अलावा स्नातक में 50 फीसदी अंक लाना अनिवार्य था, लेकिन अब यह अनिवार्यता ख़त्म कर दी गई है। नियमों में किए गए बदलाव के तहत अब प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थी का स्नातक में 50% अंक हासिल करना बाध्यकारी नहीं होगा। काफी समय से यह कोशिश की जा रही है, जो अब जाकर लागू हो सकी। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण परिषद से कहा है कि वह एक माह के अंदर नई अधिसूचना जारी करे, जिसमें बीएड कोर्स के लिए स्नातक में अंक की अनिवार्यता समाप्त की जाए। तभी से यह नियम में बदलाव की कवायद विचाराधीन थी।

राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण परिषद ने इस हेतु गाइडलाइन भी जारी कर दी है और नियमावली के सापेक्ष एक हलफनामा इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल किया है, जिसमें वर्तमान स्थिति को साफ़ करते हुए बताया गया है कि टीचर बनने की योग्यता में अब अभ्यर्थी का स्नातक होना ज़रूरी तो है, लेकिन टीचर बनने के लिए आवश्यक बी.एड.कोर्स में अब स्नातक में 50% अंक लाना ज़रूरी नहीं होगा।

हालांकि एनसीटीई ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह नियम 28 जून 2018 की अधिसूचना से पूर्व स्नातक करने वालों के लिए है। यानी 28 जून 2018 से पहले स्नातक करने वालों पर 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता लागू नहीं होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में एनसीटीई द्वारा हलफनामा दाखिल होने के बाद अब बड़ी संख्या में इसका लाभ अभ्यर्थियों को मिलेगा। साथ ही न्यूनतम अंक की प्राथमिकता ख़त्म करने से अभ्यर्थियों की संख्या में भी इजाफा होगा। यह फैसला भले ही यूपी के संदर्भ में आया है, लेकिन इसका फायदा पूरे देश के युवाओं को मिलेगा क्योंकि यह फैसला पूरे देश के लिए हुआ है।

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