भारत का एक मंदिर, जहां भगवान के सामने सजता है भूत-प्रेत का दरबार

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“भूत-पिशाच निकट नहीं आवे, महाबीर जब नाम सुनावे।”

हनुमान चालीसा की इस पंक्ति में बजरं बली से यह प्रार्थना की गई है कि प्रभु आप भूत-पिशाच से मुक्ति दिलाएं। इसका फल यह होता है कि भक्त को बुरे सपने या भूत-प्रेत का डर नहीं सताता है। इस पंक्ति को सोने से पहले पढ़ें तो रात में भी बुरे खयाल और भूत-प्रेत का डर नहीं लगता है। आज के आधुनिक युग में भी भूत-पिशाच का डर लोगों को सताता है। सच्चाई है या नहीं, पर डरते हैं और भूतों का ‘टेरर’ कायम है। यदि भूत प्राचीनकाल से हैं तो इनके छक्के छुड़ाने के उपाय भी तभी से मौजूद हैं।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर एक ऐसा स्थान है, जहां आकर लाखों श्रद्धालुओं ने अपना कष्ट दूर किया है। भूत-प्रेत, जादू-टोना इस तरह की सभी परेशानियों से मुक्ति दिलाते हैं| श्री मेहंदीपुर बालाजी। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के दौसा जिले के टोडाभीम गांव में स्थित है। यह भगवान हनुमान का मंदिर है। भारत के बहुत से भागों में श्री हनुमान को बालाजी के नाम से जाना जाता है क्योंकि उनका ज्यादातर बचपन वहीं बीता था। यह मंदिर अपने धार्मिक उपचारों और बुरी आत्माओं का भूत भगाने के लिए जाना जाता है।

मेहंदीपुर नाम का गांव छोटी पहाड़ियों के पास में ही बसा हुआ है। प्राचीन गांव ज्यादा विकसित नहीं है। मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर पूरे देशभर में मशहूर है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं और अपने कष्ट, पीड़ा से निजात पाते हैं। इस मंदिर को दुष्ट आत्माओं से छुटकारा दिलाने के लिए दिव्य शक्ति से प्रेरित हनुमानजी का बहुत ही शक्तिशाली मंदिर माना जाता है।

इस मंदिर में यहां सुबह और शाम दोनों समय आरती होती है और इस आरती की ख़ास विशेषता यह है कि आरती के वक्त कथित तौर पर भूत-प्रेत से पीड़ित लोगों को जूझते देखा जा सकता है। भक्तों का मानना है कि भूतप्रेत से पीड़ित लोगों को यहां आने के बाद प्रेत-पिशाच से छुटकारा मिल जाता है।

यहां मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के साथ ही प्रेतराज सरकार का मंदिर भी है। प्रेतराज सरकार के पास लोगों को रोते-बिलखते, जंजीर में बंधे और सिर पटकते देखा जा सकता है। यहां श्री कोतवाल कप्तान ( भैरव) भी हैं। साथ ही मंदिर के पहले महंत श्री गणेशपुरी महाराज का समाधि स्थल भी बना हुआ है।  हनुमानजी को रामभक्त कहा जाता है। यहां भी बालाजी के मंदिर के ठीक सामने श्रीराम मंदिर देखने को मिलता है। पीड़ित लोग यहां पर बिना दवा और तंत्र-मंत्र के स्वस्थ होकर लौटते हैं।

कैसे पहुंचा जाए

मंदिर आगरा-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भरतपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूरी पर और जयपुर से 100 किलोमीटर पहले बायें हाथ पर लगभग तीन किलोमीटर अंदर प्रतिष्ठित है। दौसा जिले में आने वाला यह मंदिर बांदीकुई रेलवे स्टेशन से लगभग 38 किमी. है। तथा सड़क द्वारा जयपुर या भरतपुर या अलवर की तरफ से यहां आराम से जाया जा सकता है।

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