कई पूर्वजों के शव आज भी रखे संभालकर

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हर धर्म की विभिन्न परम्पराओं के अनुसार, किसी भी शख्स की मौत के बाद उसके शव का अंतिम संस्कार किया जाता हैं। धर्म के अनुसार या तो शव को दफ़नाया जाता है या उसका दाह संस्कार किया जाता है, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो न तो शव का दाह संस्कार करते हैं, न ही उसे दफ़नाते हैं|

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तो फिर ऐसे में ये लोग शव के साथ क्या करते हैं?

दुनिया में ऐसी कई जातियां हैं, जिनके अजीबोगरीब रस्मो-रिवाज हैं और वे आज भी इन्हें फॉलो करती हैं। इंडोनेशिया के पश्चिमी न्यू गिनी में रहने वाली दानी जाति भी एक ऐसी ही परंपरा को फॉलो करती है, जिसे सुनकर किसी के भी रौंगटे खड़े हो जाएं।

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दरअसल , दानी नामक जनजाति के ये लोग, जो पहाड़ों के पीछे छिपकर रहते हैं, इन्हें बाहरी दुनिया से कोई मतलब नहीं हैं| और यही लोग हैं, जो अपने परिवार के सदस्यों की मृत्यु हो जाने के बाद उनका अंतिम संस्कार नहीं करते, जबकि उनके शवों को घरों में ही संभालकर, सजा कर रखते हैं|

ये लोग घर में ही शव को धुआं देते हैं| लगातार कई दिनों तक शव को धुआं देने से शव ममी में तब्दील हो जाता है। ममी में बदलने के बाद शव को कई सालों तक संभालकर रखा जा सकता है। इस जाति के बारे में दुनिया को सबसे पहले अमरीकी फिलैंथ्रोपिस्ट रिचर्ड आर्कबोल्ड ने 1938 में बताया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब इस जाति के दुनिया में केवल 100 लोग ही बचे हैं।

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अंकुर उपाध्याय

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