बेटे की मौत ने जगा दी इंसानियत तो बन गया देश के लिए मिसाल

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इस बार देश भर में बड़ी धूम धाम के साथ 71वां गणतंत्र दिवस (71st republic day) मनाया गया। इसी गणतंत्र दिवस (republic day) के मौके पर जब पूरा देश खुशियां मना रहा था ऐसे में ही एक इंसानियत (humanity)की मिसाल देखने को मिली। जी हां इंसानियत, जिसके कई मायने होते हैं लेकिन असल में इंसानियत (Manoj Wadhwa Fills Potholes) है क्या? ये सिखाया और बताया मनोज वधवा ने। जब कोई इंसान अपने लिए नहीं दूसरों के लिए जीता है, खुद से ज्यादा दूसरों की फिक्र करता है, ऐसे काम करता है जिससे सभी का भला हो या कोई व्यक्ति उस दर्द और तकलीफ से न गुजरे जो उस व्यक्ति पर बीती है, उसे ही इंसानियत कहते हैं। दरअसल मनोज वधवा (Manoj Wadhwa Fills Potholes) जिनकी आज हम बात कर रहे हैं उनके 3 वर्षीय बेटे की मृत्यु आज से 6 साल पहले साल 2014 में 10 फ़रवरी को एक सड़क हादसे में हो गई थी। हादसे का कारण था सड़क पर गड्ढा, जिसे प्रशासन हमेशा ही नज़रअंदाज़ कर देता है लेकिन सड़कों पर गड्ढे लोगों की मौत का सबब बन जाते हैं। लेकिन इस हादसे के बाद मनोज के अंदर इंसानियत जाग उठी और वे बन गए मिसाल देश के लिए, सरकार के लिए, प्रशासन के लिए। उनके बेटे की जान जिस गड्ढे की वजह से हुई उन्होंने जिम्मा उठाया उन्हें भरने का ताकि फिर कोई और इस तरह के हादसे का शिकार न हो, किसी की जान न जाए और कोई अपने किसी अजीज को न खोए।

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बेटे की मौत ने जगा दी इंसानियत तो बन गया देश के लिए मिसाल | Faridabad | Republic Day

बेटे की मौत ने जगा दी इंसानियत तो बन गया देश के लिए मिसाल | Faridabad | Republic Dayइस बार देश भर में बड़ी धूम धाम के साथ 71वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। इसी गणतंत्र दिवस के मौके पर जब पूरा देश खुशियां मना रहा था ऐसे में ही एक इंसानियत की मिसाल देखने को मिली। जी हां इंसानियत, जिसके कई मायने होते हैं लेकिन असल में इंसानियत है क्या? ये सिखाया और बताया मनोज वधवा ने। जब कोई इंसान अपने लिए नहीं दूसरों के लिए जीता है, खुद से ज्यादा दूसरों की फिक्र करता है, ऐसे काम करता है जिससे सभी का भला हो या कोई व्यक्ति उस दर्द और तकलीफ से न गुजरे जो उस व्यक्ति पर बीती है, उसे ही इंसानियत कहते हैं।#Delhinews #Delhilatestnews #faridabad #roadaccident #potholeaccidentnews #faridabadnewstoday #faridabadaccidentnews

Talented India News द्वारा इस दिन पोस्ट की गई मंगलवार, 28 जनवरी 2020

बस फिर क्या था मनोज ने शुरू कर डाली सड़कों पर गड्ढों को भरने की अनोखी पहल। मनोज (Manoj Wadhwa Fills Potholes) अपने तरीके से, अपने लेवल पर इन गड्ढों को भरने का काम कर रहे हैं। इस कार्य के लिए सबसे पहले तो उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से कुछ ट्यूटोरियल्स देखे कि किस तरह से वे इस कार्य को कर सकते हैं इसके बाद उन्होंने कुछ NGO जैसे मुंबई ‘पॉटहोल वॉरियर्स’ (Potholes Warriors) और बेंगलुरु (Bangalore) के ‘पैथहोल राजा’ की मदद भी ली। अब मनोज (Manoj Wadhwa Fills Potholes) पहले उन सड़कों को चिन्हित करते हैं जहाँ गड्ढे होते हैं फिर उसकी सफाई करते हैं और इसके बाद सडकों के गड्ढों को भरते हैं। इस 71वें गणतंत्र दिवस (71st Republic Day)  के अवसर पर मनोज (Manoj Wadhwa) ने फरीदाबाद (Faridabad)की सड़कों के गड्ढों को भरा। मनोज ने कहा, “हमने इस काम को करने के लिए खासतौर पर गणतंत्र दिवस को चुना। ताकि सरकारी एजेंसियों को नींद से जगाया जा सके। यदि कुछ लोग मिलकर इन सड़कों को गड्ढों से मुक्त बना सकते हैं, तो सरकार (Up Government) और ठेकेदार तमाम संसाधनों के होने के बावजूद ऐसा करने में प्रशासन असफल क्यों है?”

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दिल्ली-आगरा हाइवे (Delhi Agra Highway) पर गड्ढा होने की वजह से उनके साथ हादसा हुआ था जिसमे उनके(Manoj Wadhwa Fills Potholes) बेटे की जान चली गई थी। इस बारे में मनोज (Manoj Wadhwa) ने कहा, “अगर वो आज होता तो 9 साल का होता। सरकारी एजेंसियों के नाकारापन की वजह से हमारी खुशियां तबाह हो गईं। मैं नहीं चाहता कि और किसी के साथ ऐसा हो। अब सड़कों के गड्ढे भरना मेरे जीवन का मिशन है। भले ही मुझे अन्य लोगों से इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए समर्थन मिले या ना मिले।” हालांकि आज मनोज के साथ कई लोग जुड़ चुके हैं, लेकिन मनोज (Manoj Wadhwa Fills Potholes) ने देश के लिए जो मिसाल कायम की है वह काबिल-ए-तारीफ है। मनोज अपने दुःख से उबरने के साथ-साथ कई अन्य लोगों के जीवन को सलामत बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं। उनके इस जज्बे को देखकर मजरूह सुल्तानपुरी की वो दो लाइने याद आती हैं कि, “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया… आज मनोज के साथ भी कई लोग और NGO जुड़ चुके हैं जो इस नेक कार्य में मनोज  (Manoj Wadhwa) की मदद कर रहे हैं।

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Prabhat Jain

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