website counter widget

लोहागढ़ का किला जिसे जीतना अंग्रेजों के लिए रहा केवल सपना

0

हिंदुस्तान अपने किलों के कारण बेहद प्रसिद्ध है। हिंदुस्तान में कई ऐसे किले हैं जो काफी प्रसिद्ध हैं और इनके प्रसिद्ध होने के पीछे कोई न कोई कारण भी होता है। वैसे तो राज्थान को किलों का गढ़ का जाता है और राजस्थान में कई किले आज भी मौजूद है। कई किले रहसयमयी हैं तो कई की प्रसद्धि के कुछ और कारण हैं। हालांकि आज हम आपको जिस किले के बारे में बताने जा रहे हैं वह भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसे ‘अजेय दुर्ग’ कहा जाता है। यह किला राजस्थान के भरतपुर में स्थित है जिसे “लोहागढ़ का किला” (Lohagarh Fort) के नाम से जाना जाता है।

साइकिल सवार के चालान का वीडियो वायरल

इस किले को अजेय दुर्ग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस किले पर कोई भी विजय प्राप्त नहीं कर सका। जानकारों के अनुसार इस किले का निर्माण 19 फरवरी 1733 को हुआ था। इस किले को जाट शासक महाराजा सूरजमल ने बनवाया था। जिस वक़्त किले का निर्माण हुआ था उस समय तोप एवं बारूद का अत्यधिक प्रयोग किया जाता था। इस बात को ध्यान में रखते हुए महाराजा सूरजमल ने इस किले को इस तरह से बनवाया था ताकि इस पर गोलों का असर न हो। इस किले का निर्माण पत्थर की ऊंची दीवारों से किया गया। इन दीवारों के चारों तरफ सैकड़ों फीट चौड़ी कच्ची मिट्टी की दीवारें बनवाई गईं और नीचे गहरी व काफी चौड़ी खाई बनवाकर उसमें पानी भरा गया।

5 Mysteries of Indian Temples : प्राचीन धार्मिक स्थलों के 5 अनसुने रहस्यमयी किस्से

इस विशेषता के कारण ही इस किले पर हमला करना किसी के लिए भी आसान नहीं था। कहा जाता है कि इस किले को भेदने और इस पर विजय हासिल करने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने एक या दो नहीं बल्कि पूरे 13 बार इस पर चढ़ाई की लेकिन हर बार उन्हें धुल चाटनी पड़ी। अंग्रेजों ने तोप के गोलों की बारिश इस किले पर की लेकिन आग उगलती तोप भी इस किले का बाल भी बांका न कर सकीं। जब गोले इस किले की मिटटी की दीवार से टकराते थे तो वे इस मिटटी में धंस जाते थे और ठंडे पड़ जाते थे।

महाराजा सूरजमल की समझदारी के सामने अंग्रेजों के घातक हथियार भी फीके पड़ गए और वे कभी भी इस किले पर जीत हासिल नहीं कर सके। आखिर कार अंग्रेज हार से निराश होकर चले गए।

इस ठग ने करोड़ों रुपए में बेच दिया था पूरा देश

Prabhat Jain

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.