Video: इस गांव में सीटियां और संगीत बजाकर बात करते हैं लोग

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हमारे देश में कई धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं| सबकी भाषा-बोली भी अलग-अलग हैं| मेघालय में भी अलग भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं| यहां का एक बड़ा हिस्सा वनों से भरा पड़ा है|  इन्हीं जंगलों से घिरा एक गांव है कांगथोंग| इस गांव की सबसे अलग बात यह है कि यहां  के जंगलों में दिन में भी अजीबो-गरीब आवाजें आती रहती है| ये आवाजें किसी जानवर या पक्षी की नहीं बल्कि इंसानों की होती है|

दरअसल,  यहां एक-दूसरे को बुलाने के लिए सीटी बजाई जाती है| कांगथोंग नामक गांव में परम्परा के अनुसार बातचीत करने या फिर एक-दूसरे को बुलाने के लिए खास तरह की धुन का उपयोग किया जाता है| इस गांव में मां अपने बच्चे के लिए ख़ास तरह की धुन बनती है, जिससे बाद में सभी लोग पुकारते हैं, जैसे नाम पुकारा जाता है|

कांगथोंग में परिवार की मुखिया महिला होती है| महिलाएं बच्चों को बुलाने के लिए जो धुन का प्रयोग करती है, वह बिल्कुल चिड़ियों की आवाज़ जैसे होती है| यहां के लोगों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही परम्परा का हम सभी पालन करते हैं| मां की भावना से ही बच्चों के लिए संगीतमय नाम निकलता है| यहां परिवार के मुखिया और बुजुर्गों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे स्थानीय भाषा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाए|

इस गांव में खासी जनजाति के लोग रहते हैं|आपको जानकर हैरानी होगी कि ये लोग एक-दूसरे का नाम भी इसी भाषा में लेते हैं| हैंडी बांस से बने खूबसूरत घर प्रकृति के काफी करीब दिखाई देते हैं| वे यहां के प्राकृतिक संसाधनों का  प्रयोग करते हैं| ये अपनी सभ्यता और संस्कृति को संजोकर रखे हुए हैं| इस गांव से प्रेरित होकर बॉलीवुड में भी अपने चहेतों के लिए मधुर धुन बनाई जाती है|

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