रेलवे को पड़ा 2800 रुपए का चूहा

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भारतीय स्टेशन किसी चीज के लिए यदि फेमस है तो वह हैं चूहे। आप हिन्दुस्तान के किसी भी रेलवे स्टेशन पर क्यों न चले जाएं आपको वहां कुछ और मिले या न मिले लेकिन चूहे जरूर मिलेंगे। और चूहे भी ऐसे-वैसे नहीं बल्कि इतने बड़े चूहे कि उन्हें देखकर आप एक बार तो जरूर हैरानी में पड़ जाएंगे। आप इनकी साइज देखकर यह सोचने पर जरूर मजबूर हो जाएंगे कि ये वाकई में चूहे (Railways Spent 1.5 Crore To Kill Rats) ही हैं या फिर बिल्ली। जी हां बिल्लियों के आकर के इन चूहों से सिर्फ यात्री ही नहीं बल्कि खुद रेलवे भी परेशान है। इन चूहों से आजादी के लिए रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है और इनसे छुटकारा पाने के लिए पैसे भी पानी की तरह बहा रहा है फिर भी अब तक चूहों से आजादी नहीं मिली है।

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RTI ने जानकारी साझा करते हुए जानकारी दी कि भारतीय रेलवे ने पिछले तीन सालों के दौरान 1.52 करोड़ रुपए केवल चूहों के खात्मे के लिए खर्च कर दिए। डेढ़ करोड़ रुपए खर्च करने के बाद रेलवे केवल 5457 चूहों का खात्मा कर पाया है (Railways Spent 1.5 Crore To Kill Rats)। हालांकि कई लोगों को लगेगा कि यह काफी बड़ी बात है कि रेलवे ने लगभग साढ़े 5 हजार चूहों का सफाया कर दिया। लेकिन अगर डेढ़ करोड़ रुपए में साढ़े 5 हजार चूहों का हिसाब लगाया जाए तो इस हिसाब से एक चूहे को मारने का खर्च 2800 रुपए बैठता है।

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हालांकि इस मामले में रेलवे के एक अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि सवाल करोड़ों रुपए खर्च करने का नहीं है। यहां बात है रेलवे को चूहों से होने वाले नुकसान से बचाने की। इसी वजह से रोडेंट कंट्रोल किया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि चूहे रेलवे की सम्पत्तियों के साथ-साथ यात्रियों के सामन को भी नुकसान पहुंचाते हैं। अधिकारी का कहना है कि स्टेशन पर कई बारीक तार होती हैं। चूहे इन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर एक भी तार कट गया तो रेल व्यवस्था ठप हो सकती है, सिग्नल बंद हो सकते हैं। इसलिए चूहों के खात्मे की कवायद की जा रही है।

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Prabhat Jain

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