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‘तितली तूफ़ान’ का नाम कैसे पड़ा, जानिए कैसे होता है नामकरण

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‘तितली तूफ़ान’ ने ओडिशा और आंध्रप्रदेश के तटीय इलाकों में तबाही मचा रखी है| तूफ़ान की वजह से कई लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं वहीं इससे दो लोगों की मौत भी हो गई| क्या आप जानते हैं कि कहर बरसाने वाले इस तूफ़ान का नाम ‘तितली’ ही क्यों पड़ा और कैसे? यह पहली बार नहीं है| इसके पहले भी तूफानों को नाम दिया जा चुका है| इस पार ‘तितली’ को पाकिस्तान द्वारा नाम दिया गया|

जानकारी के अनुसार, देश में 1839 में आंध्रप्रदेश में “कोरिंगा” नामक तूफान ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें करीब तीन लाख लोगों की मौत हुई थी| भारत की पहल पर पहली बार हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने मिलकर चक्रवात को नाम देने की योजना बनाई| इसके बाद वर्ष 2002 में पहली बार इस व्यवस्था को शुरू किया गया| कटरीना, हुदहुद, फैलिन एवं कोरिंगा जैसे तूफ़ान पहले ही तबाही मचा चुके हैं|

भारत के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाइलैंड ने मिलकर चक्रवात को नाम देने की व्यवस्था की शुरुआत की| इसके लिए सभी देशों के मौसम वैज्ञानिकों से नामों की सूची बनवाई गई| एक देश की तरफ से आठ नाम प्रस्तावित थे| आठों देशों को अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों के अनुसार मौक़ा दिया गया| इससे बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड का क्रम बना| ‘तितली’ इनमें से 54वां है और अब 10 नाम और बचे हुए हैं| इस बार नामकरण करने की बारी पाकिस्तान की थी और उन्होंने तितली नाम प्रस्तावित किया था इसलिए इस बार के तूफ़ान को तितली से पुकारा जा रहा है| वहीं अटलांटिक महासागर के क्षेत्र में आने वाले चक्रवातीय तूफान को ‘हरिकेन’, प्रशांत महासागर के क्षेत्र में आने वाले तूफ़ान को ‘टाइफून’ और हिंद महासागर के क्षेत्र में आने वाले तूफ़ान को ‘साइक्लोन’ कहा जाता है| नाम इसीलिए तय किए गए हैं क्योंकि इससे तूफ़ान की दिशा तय होती है|

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