यहां निकाह से पहले होती है गणेश पूजा

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देश में धार्मिक भेदभाव के कारण कई समस्याओं का उदय होता है| लोग इन समस्याओं को सुलझाने के बजाय बढ़-चढ़कर इनका समर्थन करते और देश में दंगे जैसे हालात बनाते हैं, लेकिन आज भी कई लोग ऐसे हैं, जो धार्मिक एकता को बढ़ावा देते हैं, जो धार्मिक भेदभाव से परे साथ मिलकर रहने में विश्वास करते हैं | ये लोग हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए ऐसे कई कार्य करते हैं, जिनसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम हो जाती है|

हिन्दू -मुस्लिम एकता की मिसाल

मुस्लिम निकाह के दौरान गणेश पूजा की बात सुनकर शायद सभी हैरान हो जाएंगे| हमने शायद ही कभी सुना होगा या सोचा होगा कि मुस्लिम शादी में गणेश पूजा हो सकती हैं, हिन्दू रीति-रिवाजों का पालन हो सकता है| गुजरात से  ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें मुस्लिम निकाह के दौरान पहले गणेश पूजा की गई और फिर अन्य रस्में निभाई गईं| दरअसल, गुजरात के  वेरावल में शबनम को पालने वाले हिन्दू परिवार ने उसका निकाह अब्बास से करवाया, लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है, जब मुस्लिम निकाह में हिन्दू रिवाज निभाए गए हों|

यहां मुस्लिमों की हिन्दू रिवाज से होती है शादी

गुजरात के कच्छ का रण के बन्नी में मल्धारी मुस्ल‍िम समुदाय निवास करता है| ये लोग पाकिस्तान से आकर यहां बस गए थे| ये लोग पशुपालन को महत्व देते हैं और हिन्दुओं के कई रिवाजों का पालन भी करते हैं| इनकी शादी में हिन्दू -मुस्लिम रिवाजों का मेल देखने को मिलता है| यहां गणेश पूजा, गाय पूजा और फुलेकू के साथ ही निकाह पढ़ा जाता है| फुलेकू के समय दूल्हा-दुल्हन को पूरे गांव में घुमाया जाता है|

साथ मनाते हैं हर त्यौहार

मल्धारी मुस्ल‍िम समुदाय के लोगों की बन्नी इलाके में 18 हजार से ज्यादा जनसंख्या हैं| यहां धार्मिक भेदभाव को जगह नहीं दी गई है| इस क्षेत्र में रहने वाले हिन्दू-मुस्लिम दोनों के त्योहारों को साथ में निभाते हैं| बड़ी बात तो यह है कि यदि कोई हिन्दू मुस्लिम समारोह में पहुंचता है तो समुदाय नॉनवेज भी नहीं खाता है|

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