जापान का मंदिर जिसमे नंगे जिस्म होती है पूजा

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  • जापान का बेहद अजीबोगरीब त्यौहार
  • प्रतिवर्ष फ़रवरी के तीसरे शनिवार को मनाया जाता है नेकेड फेस्टिवल ‘हड़का मत्सुरी।’
  • जापान के ओकायामा शहर के सैदाईजी कान्नोनीन मंदिर में होता है आयोजित।
  • केवल 30 मिनट का होता है ये त्यौहार।

दुनियाभर के तमाम देशों में बेहद ही विचित्र तरह की परम्पराएं, मान्यताएं विद्यमान हैं जिनके बारे में जानकार हम सभी आश्चर्य में पड़ जाते हैं। इसी तरह कई देशों में कई विचित्र तरह के खेल खेले जाते हैं तो कई जगह कई अजीबोगरीब त्यौहार (Hadaka Matsuri Festival) मनाए जाते हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक बेहद अजीबोगरीब त्यौहार के बारे में बताने जा रहे हैं जो जापान देश में मनाया जाता है। इस त्यौहार का नाम है ‘हड़का मत्सुरी’ (Hadaka matsuri) जिसे नेकेड फेस्टिवल भी कहा जाता है। नेकेड फेस्टिवल से मतलब तो आप सभी अच्छी तरह से समझ ही गए होंगे। इसे नेकेड फेस्टिवल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें हिस्सा लेने वाले लोग बेहद ही कम कपड़े या यूं कहें कि न के बराबर कपड़े पहनते हैं। यह त्यौहार प्रतिवर्ष मनाया जाता है। हर साल फ़रवरी माह के तीसरे शनिवार को यह त्यौहार आयोजित किया जाता है जिसमें शामिल होने के लिए जापान के तमाम शहरों से लोग आते हैं।

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यह नेकेड फेस्टिवल जापान के दक्षिणी हिस्से होन्शू आइलैंड पर बने सैदाईजी कान्नोनीन मंदिर (Kinryozan Saidaiji kannonin) में आयोजित किया जाता है जो ओकायामा शहर से 30 मिनट की दूरी पर है। इस त्यौहार के दौरान लोग कम से कम कपड़ों में मदिर जाते हैं और पूजा करते हैं। इस साल ये त्यौहार 15 फ़रवरी को मनाया गया। इस त्यौहार में हिस्सा लेने वाले लोगों को अपने शरीर पर केवल लंगोट पहनना होता है इसके अलावा शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं होता। इसके अलावा लोग सफ़ेद रंग का मोजा, जिसे तबी कहते हैं वो भी पहनते हैं। जापान में लंगोट को फुंदेशी कहा जाता है।

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गौरतलब है कि दोपहर से इस त्यौहार की शुरुआत हो जाती है और जापानी (Hadaka Matsuri Festival Japan) महिलाएं परंपरागत नृत्य से इसका शुभारंभ करती हैं। इसके बाद शाम 7 बजे से आतिशबाजी शुरू की जाती है। इसके बाद शाम को ही मंदिर की लगभग 2 घंटे तक तक परिक्रमा लगाई जाती है और इस दौरान लोगों पर ठंडा पानी फेंका जाता है। कड़कड़ाती ठंड में ठंडे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है और इस पानी से होकर गुजरने के बाद ही लोगों को पवित्र माना जाता है। पवित्र होने के बाद ही लोगों को मंदिर में प्रवेश मिलता है। इसके बाद रात 10 बजे शुरू होता है अपने साल को लकी बनाने का त्यौहार और भाग्यशाली छड़ी लपकने की होड़। इस दौरान मंदिर के पुजारी मंदिर की 4 मीटर ऊंची खिड़की से टहनी के 100 बंडल और 20 सेंटीमीटर लंबी छड़ी फेंकते हैं। इस भाग्यशाली छड़ी को लपकने के लोग टूट पड़ते हैं और इसी कोशिश में लोगों को चोट भी लगती है और हाथ-पैर भी छिलते हैं लेकिन लोगों का उत्साह कम नहीं होता। जिसके हाथ भी यह छड़ी लगती है उसका पूरा साल लकी साबित होता है। मान्यता है कि यह त्योहार (Hadaka Matsuri Festival Japan)  फसल की उपज में बढ़ोतरी, समृद्धि और पुरुषत्व में इजाफा करता है। ऐसा कहा जाता है कि इस त्यौहार की शुरुआत 500 वर्ष पूर्व मुरोमाची काल से हुई थी और उस समय मंदिर के पुजारी कागज़ फेंका करते थे जिसे लकी कागज़ कहा जाता था। हालांकि कागज़ लपकने के दौरान फट जाता था और कपडा भी इसलिए फिर इसमें बदलाव किया गया और अब उसकी जगह छड़ी फेंकी जाती है।

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Prabhat Jain

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