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इस गांव में प्रतिवर्ष लगता है भूतों का मेला

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हम सभी ने कई बार भूत-प्रेत की कहानी (Bhoot Mela) तो जरूर सुनी हैं और इसे सुनने में हमें काफी मज़ा भी आता है। हालांकि आज के दौर में कई लोग भूत-पिशाच पर यक़ीन नहीं रखते और इनकी कहानियों को बेबुनियाद मानते हैं। पर देश में आज भी कई लोग मौजूद हैं जो इन पर विश्वाश भी करते हैं और इन्हें सच भी मानते हैं।

वहीं आज भी देश में कई ऐसी जगह मौजूद हैं जिन्हें लोग हॉन्टेड प्लेस यानी भूतिया जगह मानते हैं। इतना ही नहीं देश में कई ऐसी मान्यताएं हैं जो सदियों से चली आ रही हैं। आज हम आपको भूत-प्रेतों से जुड़ी ऐसी ही मान्यता के बारे में बताने जा रहे हैं।

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आज भी देश में एक ऐसा गांव मौजूद है जहां पर भूतों का मेला लगता है। जी हां आपने बिल्कुल ठीक सुना कि यहां भूतों का मेला (Bhoot Mela) लगता है। हालांकि यह बात सुनने में थोड़ी अजीब जरूर लगी होगी कि आखिर कहीं भूतों का मेला कैसे लग सकता है। तो चलिए जानते हैं इस गांव और यहां की मान्यता के बारे में। सबसे पहले आपको बता दें कि यह गांव मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित है।

बैतूल जिले से 42 किमी. दूर मलाजपुर गांव बसा हुआ है। इसी गांव में प्रतिवर्ष भूतों का मेला लगता है। साल में लगने वाले इस भूतों के मेले में गांव के लोग भी शामिल होते हैं। इस मेले की यही खासियत है कि यह मेला इंसानों के लिए नहीं बल्कि भूतों के लिए ही आयोजित किया जाता है।

ऐसा मंदिर जहां की मूर्तियां करती हैं आपस में बातें

गांव में बने देवजी महाराज मंदिर में प्रतिवर्ष इस मेले (Bhoot Mela) का आयोजन किया जाता है। इस मेले में ऐसे व्यक्ति जिन पर बुरी आत्माओं, भूत-प्रेत और चुड़ैल का साया होता है, एक पेड़ की परिक्रमा लगाते हैं। गांव के लोगों की मान्यता है इस पेड़ की परिक्रमा लगाने से प्रेत-बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह मान्यता और परम्परा वर्षों पुरानी है और काफी लंबे समय से चली आ रही है।

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इस मान्यता के अनुसार जिन लोगों पर प्रेत-बाधाएं होती हैं वे लोग अपने हाथ और मुंह में जलता हुआ कपूर रखते हैं और पेड़ की परिक्रमा करते हैं। हर साल इस मेले में कई लोग भूत-प्रेत की बाधाओं के साथ पहुंचते है। इसलिए इसे भूतों का मेला कहा जाता है।

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