क्या आप जानते हैं एक राखी ने बचाई थी सिकंदर की जान

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हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का बहुत महत्व है| इस दिन बहनें भाइयों को राखी बांधती हैं| इससे भाई बहन का रिश्ता और मजबूत होता है| राखी का यह त्यौहार सिर्फ खून के रिश्ते तक ही सिमित नहीं, बल्कि अनजान रिश्तों को भी कच्चे धागे के माध्यम से बांधा जाता है| आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे विश्वजेता सिकंदर की जान सिर्फ एक राखी के कारण बची थी|

दरअसल, राखी का इतिहास सिंधु घाटी की सभ्यता के साथ जुड़ा हुआ है| लगभग 6 हजार साल पहले रक्षाबंधन की परंपरा ही उन बहनों ने शुरू की थी जो सगी नहीं थीं| माना जाता है कि सबसे पहले रानी कर्णावती ने सम्राट हुमायूं को राखी बांधी थी| उस समय राजपूत और मुस्लिमों के बीच घमासान चल रहा था| अपनी प्रजा की भलाई के लिए रानी जो चित्तौड़ कि राजा की विधवा थीं, उन्होंने हुमायूं को राखी भेजी थी| तब हुमायूं ने उनकी रक्षा कर उन्हें बहन का दर्जा दिया था और युद्ध पर विराम लगा दिया था|
एक राखी से बची थी जान
विश्व विजेता के नाम से पहचाने जाने वाला सिकंदर ईरान, अफगानिस्तान जैसी कई देशों को जीतकर भारत के पंजाब पहुंचा| उस समय पंजाब में महाराज पोरस का राज़ था| सिकंदर ने राजा के पास अपना एक दूत भेजा और राज्य सौंपने को कहा, जिसे राजा ने ठुकरा दिया| इसके बाद दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया, जो कई दिनों तक चला| सिकंदर के साथ उसकी प्रेमिका भी भारत आई थी| जब सिंकदर युद्ध में हारने वाला था उस समय राखी का त्यौहार आने वाला था, जिसके बारे में सिकंदर की प्रेमिका को पता चला| उसने जब त्यौहार के बारे में पूछा तो भारतीय महिलाओं ने बहुत अच्छे सब समझाया| लड़ाई के बाद भी मिला अपनापन देखकर वह हैरान थी|
जब रक्षाबंधन का त्यौहार आया तो सिकंदर की जान की रक्षा के लिए उसकी प्रेमिका ने राजा को राखी बांधने का फैसला किया| इसके बाद राजा के शिविर के पास पहुंचकर उसने कहा कि छोटी बहन का प्यार स्वीकार करें| राजा ने ख़ुशी से बहन को स्वीकार किया और राखी बंधवाई| इसके बाद जब युध्द हुआ और सिकंदर की जान पर बन आई तो राजा ने अपनी बहन के सुहाग को जीवनदान दे दिया|

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