यहां रहते हैं बउआ ही बउआ

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किंग खान की फिल्म ‘ज़ीरो’ में बउआ बने शाहरुख़ खान भले ही बड़े परदे पर पहले दिन कमाल नहीं दिखा पाए हो, लेकिन उनके रूप की सभी सराहना कर रहे हैं| आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बता रहे हैं, जहां एक दो नहीं बल्कि कई बउआ पाए(Dwarf Village) जाते हैं| उस गांव में कई लोग बउआ की तरह दिखने वाले लोग यानी बौने लोगों को देखने जाते हैं|

दरअसल, असम के अमार गांव(Dwarf Village), जिसे हमारा गांव भी कहते हैं, वहां कई लोग बौने हैं| भारत-भूटान सीमा से कोई तीन-चार किलोमीटर पहले अमार नाम के इस गांव में 70 लोग रहते हैं| इस गांव को लोग बौनों के गांव से भी जानते हैं| वहीं इस गांव को बसाने वाले पबित्र राभा को बौनों का सरदार माना जाता है| इस गांव में रहने वाले लोगों को ऊंचाई साढ़े तीन फीट से ज्यादा नहीं है|

बताया जा रहा है कि इस गांव में कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें बौना(Dwarf Village) होने के कारण उनके परिवार वाले छोड़कर चले गए| वहीं कई लोग ऐसे भी हैं, जो अपनी मर्जी से गांव में रहने आ गए| अमार में रहने वाले सभी लोग दिन में खेती करते हैं और रात होते ही रंगमंच के कलाकार के तौर पर नज़र आने लगते हैं| इनकी इच्छा है कि ये लोग भी शाहरुख़ खान के जैसे ‘ज़ीरो’ बनाएं| इस गांव की ख़ास बात यह है कि इसे वर्ष 2011 में बौनों के सरदार पबित्र राभा ने बसाया था, जो ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ के कलाकार हैं|

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