इंसान से ज्यादा बेजुबान जानवरों में होती हैं भावनाएं

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जिस तरह हम इंसानों में भावनाएं होती हैं उसी तरह बेजुबान जानवरों में भी भावनाएं (Animal Emotion) होती हैं। उन्हें भी ख़ुशी और ग़म का एहसास होता है। जिस तरह इंसान किसी अपने की मौत पर शोक व्यक्त करते हैं और कई दिनों तक उसी के ग़म में डूबे रहते हैं। ठीक उसी तरह जानवर भी शोक व्यक्त करते हैं, मातम मनाते हैं और ग़म में डूब जाते हैं। जिस प्रकार हम इंसान दुःख को समझते हैं महसूस करते हैं ठीक उसी तरह दुनिया के तमाम बेजुबान जानवर भी दुःख को महसूस करते हैं। यह बात जानवरों के बारे में अध्ययन से सामने आई है। आम आदमी की भाषा में कहा जाए तो ‘दुख’ वह मूल्य है जो हम प्यार के लिए चुकाते हैं।

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जानवरों पर किए गए अध्ययन (Animal Emotion) से पता चला कि साल 2018 में बैंकूवर द्वीप के तट के करीब एक शिकारी व्हेल के बच्चे की मौत हो गई थी। बच्चे की मौत हो जाने पर उसकी मां 17 दिनों तक अपने बच्चे के शव को अपने साथ लेकर घूमती रही। ऐसी ही एक घटना दो साल पहले ज़ांबिया के चिम्फुंशी वन्यजीव अनाथालय ट्रस्ट में देखने को मिली थी। यहां नोएल नाम की मादा चिंपाजी अपने मृत बच्चे के दांत साफ़ करते हुए दिखाई दी थी। इसके अलावा साल 1972 में भी एक ऐसी घटना सामने आई थी जहां एक युवा चिंपाजी ने अपनी मां की मौत के शोक में खाना-पीना और समूह में मिलना-जुलना छोड़ दिया था। मां की मौत के एक माह बाद उसकी भी मौत हो गई।

जानवरों की इन्हीं भावनाओं के बारे में कई शोधकर्ताओं ने शोध किया और अध्ययन में पाया गया है कि इंसान की तरह जानवर भी शोक मनाते हैं। उनकी भावनाएं और संवेदनाएं भी इंसानों की भांति ही होती है। किसी सदस्य की मौत हो जाने पर जानवर भी मातम मनाते हैं।

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जानवरों के बारे में अध्ययन करने वाली ‘विलियम एंड मैरी कॉलेज’ से मानव विज्ञान की रिटायर प्रोफेसर डॉ. बारबरा जे किंग का कहना है कि, “प्यार करना और शोक मनाना इंसानों तक सीमित नहीं है। ये भावनाएं जानवरों में भी होती हैं।” डॉ. किंग ने “हाउ एनिमल्स ग्रीव” नामक एक किताब भी लिखी है। इसके अलावा और कई शोधकर्ताओं ने जानवरों की इन भावनाओं के बारे में विस्तार से बताया है।

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