टेस्ट ट्यूब वाली गाय देगी 15 गुना ज्यादा दूध

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अभी तक सभी दूर हमने डिजिटल क्रांति की बातें सुनी होंगी, लेकिन अब जो खबर आप पढ़ रहे हैं, उसके बाद आप भी सोचेंगे कि तकनीक का उपयोग इस क्षेत्र में भी किया जाना वाकई क्रांतिकारी कदम है। अभी तक देश में गायों की बेहतर नस्ल बनाने के लिए संकर प्रणाली का उपयोग होता था, लेकिन अब गायों की अच्छी किस्म ठीक उसी तरह से पैदा की जा सकेंगी, जिस तरह से मानव जाति  की चिकित्सकीय उत्पत्ति की जाती है यानी टेस्ट ट्यूब के जरिये।

अब देश में गाय की बछियों का जन्म भी आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब तकनीक से करवाया जा सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दुधारू नस्ल की गाय से एक साल में 30 बछिया पैदा की जा सकेंगी। अच्छी नस्ल की गाय के ओवम के जरिये 30 भ्रूण तैयार किए जा सकते हैं। दावा है कि इस तकनीक से जनवरी 2020 तक बछिया पैदा होनी शुरू हो जाएंगी।

इन भ्रूणों को शरीर से बाहर परखनली में रखा जाता है। सात दिन तक कृत्रिम तापमान देकर भ्रूण को विकसित किया जाता है। इसके बाद इन भ्रूणों को ऐसी गायों में प्रत्यारोपित किया जाता है, जो कम दूध देती हैं। मसलन कोई गाय 1 लीटर दूध देती है, उसमें दुधारू नस्ल के भ्रूण को प्रत्यारोपित कर दिया जाता है, जिससे पैदा होने वाली बछिया 15 लीटर तक दूध दे सकेगी यानी करीब 15 गुना ज्यादा।

4 महीने में देशभर में स्थापित होंगी लैब

इस तकनीक का सफल प्रयोग पिछले दिनों पुणे में किया जा चुका है। अब पूरे देश में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए इस तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। इसके लिए पूरे देश में मार्च 2019 तक लैब स्थापित की जा रही हैं। यहां गाय-भैंसों में भ्रूण प्रत्यारोपण कर जनवरी 2020 तक बछिया पैदा होनी शुरू हो जाएंगी। इस तकनीक का इस्तेमाल ब्राजील, अमरीका, फ्रांस आदि देशों में किया गया है।

लैब में यह भी होगा

लैबों में गाय-भैसों में प्रजनन बढ़ाने के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें स्वस्थ गाय के गर्भ में उन्नत तकनीक के माध्यम से एक से अधिक भ्रूण पैदा किए जाते हैं। वहीं लैब की मदद से 3 हजार देशी नस्ल के सांड तैयार किए जाएंगे। मौजूदा समय देश में केवल 600 सांड हैं, लेकिन जरूरत 5885 सांड की है। 2021-2022 तक 3 हजार सांड तैयार होंगे। देश में गाय, भैंस, बैल और भैसें की संख्या करीब 30 करोड़ हैं, इसमें करीब साढ़े 21 करोड़ गाय और भैसें हैं।

ऐसे में नई तकनीक के माध्यम से ऐसी गायों को पैदा किया जाएगा, जो कि गायों की बेहतर नस्ल के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

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