423 वर्ष बाद ठुनी माता पूजन

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मध्यप्रदेश के देवास जिले में हाटपीपल्या के समीप लिंबोदा गांव में सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में ठुनी माता का पूजन कर उन्हें गांव में प्रवेश करवाया गया| इसके लिए रविवार रात 9 घंटे तक गांव में सन्नाटा रहा|

बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह गांव में ब्रह्ममुहूर्त में सबसे पहले गोमाता को गांव में प्रवेश करवाया गया| इसके बाद ग्रामीणों ने प्रवेश किया| इसके बाद सुबह 5 बजे चारों दिशाओं की करीब 9 किमी लंबी सीमा को दूध की धारा गिराकर कच्चे सूत और पंचरंगी नाड़े का बंधन बांधा गया| बड़ी बात यह है कि इस पूजा में मुस्लिम परिवारों ने भी हिस्सा लिया|

लोगों का मानना है कि ऐसा करने से गांव से सारी विपदाएं दूर हो जाएंगी और सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी| इसके पहले गांव में यह पूजा 413 वर्ष पूर्व यानी विक्रम संवत् के वर्ष 1652 में हुई थी| गांव में पांच दिन पहले से ही हवन-पूजन शुरू हो गया था और रविवार रात आठ बजे बाद सभी ग्रामीण अपने घरों के खिड़की-दरवाजों को खुला रखकर, मिट्टी के बर्तन और अन्य सामान साथ लेकर गांव की सीमा के बाहर गए चले गए और गोमाता के प्रवेश करने के बाद ही गांव में प्रवेश किया|

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