Vat Savitri Vrat 2019 : ऐसे करें वट वृक्ष की सही विधि से पूजा

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सावित्री ने कठिन तप से अपने पति की रक्षा की थी | सत्यवान के प्राण जब यमराज ले जाने लगे तो सती भी उनके पीछे जाने लगी परंतु यमराज ने उन्हें तीन वचन मांगने का कहकर लौटने को कहा | तीन में से एक वचन में सावित्री ने सौ पुत्र मांगे और यमराज ने तथास्तु कह दिया| इसके बाद सावित्री ने कहा कि मैं पतिव्रता नारी हूं, बिना पति के आपका वरदान पूरा कैसे होगा | तब यमराज ने चने के रूप में सत्यवान के प्राण सावित्री (Vat Savitri Vrat 2019 ) को दे दिए तथा सावित्री ने सत्यवान के मुंह में चने रखकर उसे फिर जीवित किया |

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तब से ही पति की लम्बी उम्र के लिए महिलाएं वट सावित्री व्रत का व्रत करने लगीं | वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। इस साल वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2019 ) 3 जून 2019 को रखा जाएगा। इस बार वट सावित्री व्रत के लिए बहुत ही अच्छा संयोग बन रहा है। इस दिन सोमवती अमावस्या, सर्वार्थसिद्ध योग, अमृतसिद्ध योग के साथ-साथ त्रिग्रही योग लग रहा है। इससे ये दिन बेहद शुभ रहेगा। इस दिन सुहागन स्त्रियां अपनी पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है। इस दिन शनिदेव का जन्म हुआ था, इसलिए महिलाएं इस दिन वट और पीपल की पूजा कर शनिदेव को प्रसन्न करती हैं। इतना ही नहीं इस दिन महिलाएं पूरे 16 श्रृंगार करती है।

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वट सावित्री व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त (Vat Savitri Vrat 2019 Tithi And Muhurt)

अमावस्‍या तिथि प्रारंभ : 02 जून 2019 को शाम 04 बजकर 39 मिनट से
अमावस्‍या तिथि समाप्‍त : 03 जून 2019 को दोपहर 03 बजकर 31 मिनट तक

वट सावित्री पूजन विधि (Vat Savitri Vrat 2019 Puja Vidhi)

इस व्रत (vat savitri vrat) की पूजा के लिए विवाहित महिलाओं को बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करनी होती है। फिर सुबह नहाने के बाद पूरे 16 श्रृंगार करके दुल्‍हन की तरह सज-धजकर हाथों में प्रसाद लें।

प्रसाद के रूप में थाली में गुड़, भीगे हुए चने, आटे से बनी हुई मिठाई, कुमकुम, रोली, मौली, 5 प्रकार के फल, पान का पत्ता, धूप, घी का दीया, एक लोटे में जल और एक हाथ का पंखा लेकर बरगद पेड़ (Vat Savitri Vrat 2019 ) के नीचे जाएं। फिर पेड़ की जड़ में पानी चढ़ाकर प्रसाद चढ़ाएं और धूप तथा दीपक जलाएं।

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सावित्री ने सत्यवान के मुंह में चने रखकर उसे फिर जीवित किया था,  इसीलिए  इस व्रत में चने की प्रसादी का विशेष महत्व है | इसका अनुष्ठान वटवृक्ष के नीचे किया जाता है तथा वटवृक्ष के आसपास कच्चा सूत लपेटा जाता है |

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