क्या सच में थे रावण के दस सिर ? क्यों कहलाए दशानन ?

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देशभर में 19 अक्टूबर को दशहरे का त्यौहार मनाया जाएगा| वहीं कई जगह आज ही लोग इस पर्व को मना रहे हैं| प्राचीन कथाओं के अनुसार, दशानन कहलाने वाले रावण का आज के ही दिन भगवान श्रीराम ने वध किया था, तभी से यह त्यौहार मनाया जाता है| इसे अधर्म पर धर्म की जीत और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है| हमारे सामने बचपन से रावण की दस सिर वाली छवि बताई गई है| हम सभी यह जानते हैं कि उनके दस सिर थे, लेकिन क्या वास्तव में यह सच है? यह सवाल भी उठाना गलत नहीं है कि क्या किसी व्यक्ति के दस सिर हो सकते हैं? आज हम आपको ऐसी ही कुछ बातें बता रहे हैं, जिनके बारे में आप शायद नहीं जानते होंगे|

कुछ जानकारों का कहना है कि रावण के दस सिर नहीं थे, बस लोगों के मन में यह भ्रम डाला गया था इसलिए उन्हें दशानन नाम दिया गया| वहीं जैन शास्त्रों में लिखा गया है कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार नौ मणियां होती थीं, जिनमें उनका सिर दिखता था, जो ऐसे प्रतीत होते थे, जैसे रावण के दस सिर हों| इसी कारण लोगों के मन में यह भ्रम आया कि रावण के दस सिर हैं|

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि मेघनाद के जन्म के पहले रावण अपने अनुसार ग्रह-नक्षत्रों को जमा लिया करता था| ऐसा इसलिए ताकि उसका होने वाला पुत्र अमर हो| जब शनि ने अपनी चाल बदली तो रावण ने उन्हें बंदी बना लिया|

क्या सीता रावण की बेटी थी?

थाइलैंड में रामायण में यह बताया गया है कि सीता रावण की ही बेटी थी| दरअसल, ऐसा कहा गया है कि एक भविष्यवाणी, जिसमें कहा गया था कि ‘यही लड़की तेरी मौत का कारण बनेगी’| इसके बाद रावण ने सीता को जमीन में दफ़ना दिया था| इसके बाद राजा जनक को सीता जमीन से मिली थी|

संगीत प्रेमी रावण

ऐसा कहा जाता है कि रावण को संगीत सुनने का बहुत शौक था| रुद्र वीणा बजाने में उन्होंने महारथ हासिल कर ली थी, इसमें उन्हें हराना नामुमकिन था| जब भी कोई परशानी आती थी तो वे वीणा बजकर ही मन को शांत करते थे|

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