जानिए गणपति को क्यों इतना प्रिय है मोदक

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देश में गणेश उत्सव की धूम है। बड़े ही ज़ोरों-शोरों से भगवान गणेश का त्योहार मनाया जा रहा है। भगवान की पूजा-अर्चना कर उन्हें मोदक का भोग लगाया जाता  है। कहते हैं कि यदि गणपती को प्रसन्न करना है तो उन्हें मोदक का भोग लगाना चाहिए। आज हम आपको बता रहे हैं कि गणेशजी को आखिर मोदक का ही भोग क्यो लगाया जाता है (Lord Ganesha Loves Modak)। गणपति देव को चाहे छप्पन व्यंजन का भोग लगा दिया जाए, लेकिन बिना मोदक के वो प्रसन्न क्यों नही होते हैं?

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भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्यकाल हुआ था। उन्हें गुड नारियल के मोदकों का भोग लगाया जाता है। पुराणों में मोदक के बारे में बताया गया है। मोदक का अर्थ होता है आनंद यानि खुशी (Lord Ganesha Loves Modak)। भगवान गणेश को भी हमेशा खुश रहने वाला माना जाता है।इसीलिए उन्हे मोदक का भोग लगाया जाता है। मोदक को ज्ञान का भी प्रतीक माना जाता है और बप्पा को ज्ञान का देवता माना जाता है, इसीलिए भी गणपती को मोदक का भोग लगाते हैं।

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मोदक के लिए प्रचलित कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश और परशुराम के बीच लड़ाई हुई थी। इस लड़ाई में गणपती का दांत टूट गया था। दांत टूटने के कारण उन्हें खाने में परेशानी होती थी। इसीलिए उनके लिए मोदक बनाए जाने लगे, जिसे वे आसानी से खा लेते थे। मोदक बहुत मुलायम होता है और मुंह में जाते ही घुल जाता है इसी के बाद मोदक गणेशजी का प्रिय हो गया।

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