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Dhanteras 2019 : क्यों मनाया जाता है धनतेरस का पर्व?

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वैसे तो हिन्दू धर्म शास्त्रों में हर त्यौहार का बेहद महत्व है लेकिन धनतेरस के पर्व को बेहद ख़ास माना जाता है। धनतेरस का पर्व प्रतिवर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयादशी तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन से दिवाली की शुरुआत भी हो जाती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था। इसलिए भगवान धनवंतरि के जन्म दिवस को धनतेरस (Dhanteras 2019) के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन माता महालक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। यह परपरा बेहद प्राचीन समय से चली आ रही है।

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जब समुद्र मंथन किया गया था उस दौरान जो अमृत कलश समुद्र से निकला था वह कलश धनवंतरि भगवान ही लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस (Dhanteras 2019) के जुड़ी और भी कई कथाएं व मान्यताएं हैं। चलिए जानते हैं इससे जुड़ी कथाओं के बारे में कि आखिर दिवाली पहले धनतेरस क्यों मनाया जाता है?

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जैसा कि हिन्दू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि समुद्र मंथन के दौरान स्वर्ण कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे। इसी अमृत को पीकर देवता अमर हुए। इसलिए भगवन धनवंतरि के जमदिवस के रूप में धनतेरस (Dhanteras 2019) मनाया जाता है। वहीं कहा जाता है कि भगवान धनवंतरि के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद मां लक्ष्मी अवतरित हुईं। इसी वजह से धनतेरस के ठीक दो दिन पश्चात दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।

भगवान धनवंतरि को देवताओं का वैद्य भी कहा जाता है। वहीं धर्म शास्त्रों में मान्यता है कि भगवान धनवंतरि की पूजा करने से आरोग्य सुख यानी की स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है (Dhanteras 2019)। धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान धन्वंतरि श्री हरी विष्णु के ही अंशावतार हैं। भगवान विष्णु ने ही संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए भगवान धन्वंतरि का अवतार धरती पर लिया था।

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Prabhat Jain

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