आखिर क्यों तेल चढाने से शनि होते हैं प्रसन्न, जरूर जानिए

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शनिवार (Saturday) को सभी लोग शनिदेव (Shani Dev) को प्रसन्न (happy) करने के लिए उनकी मूर्ति पर तेल और काला तिल चढ़ाते हैं। शनिदेव को तेल और तिल चढाने की यह प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है। चूंकि शनिदेव न्याय के देवता कहलाते हैं और इनके क्रोध से देवता भी थर-थर कांपते हैं। वहीं यदि किसी पर शनि की वक्र दृष्टि हो तो उसे बने-बनाए काम भी बिगड़ जाते हैं। हालांकि शनिदेव को अधिकतर लोग बुरे कर्मों का फल देने वाला देवता मानते हैं लेकिन शनिदेव केवल बुरे कर्मों का फल नहीं बल्कि अच्छे कर्मों का फल भी प्रदान करते हैं।

Shani Dev : इसलिए शनिदेव हो जाते हैं खफा

शनिवार (Saturday) को शनिदेव (Shani Dev) का दिन होता है और इस दिन शनिदेव से जुड़े दान करने और उनके मंत्र का जाप करने से शनिदेव प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे में व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति पाने में काफी मदद मिलती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में आई साढ़े साती भी उतर जाती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार शनिदेव अकारण ही किसी व्यक्ति को पीड़ा या कष्ट नहीं देते बल्कि वे न्यायाधीश और दंडाधिकारी हैं। वे केवल मनुष्य को उसके अच्छे और बुरे कर्मों का फल देते हैं। अगर किसी को बुरा फल मिल रहा है तो यह उसके गलत कार्यों का ही परिणाम है।

Shani Dev Pooja Vidhi : शनिदेव की पूजा करने का सही तरीका जानें

वहीं शनिवार के दिन शनिदेव (Shani Dev) की पूजा-अर्चना की जाती है जिसमें लोग शनिदेव को तेल और काले तिल चढ़ाते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि जब एक बार राम भक्त महावीर हनुमान अपने प्रभु श्री राम के किसी कार्य में व्यस्त थे तभी उस जगह से शनिदेव गुजरे। शनिदेव की नज़र जब बजरंगबली पर पड़ी तो शनिदेव को स्वाभाव के अनुरूप शरारत सूझ गई और वे पहुंच गए हनुमान जी के पास उनके कार्य में विघ्न डालने। हालांकि श्री राम के कार्य में विघ्न डालने से पहले ही बजरंगबली ने शनिदेव को चेतावनी दी और उन्हें ऐसा करने से रोका लेकिन शनिदेव कहां मानने वाले थे। शनिदेव कार्य में बाधा उत्पन्न करना चाहते थे और बजरंगबली को कार्य पूर्ण करना था इसलिए बजरंगबली ने अपनी पूंछ में शनिदेव को जकड़ लिया।

हनुमान जी शनिदेव (Shani Dev) को पूंछ में जकड़े हुए इधर-उधर घुमते हुए राम काज में लगे हुए थे इस वजह से शनिदेव को कई चोटें आई। शनिदेव के अनेक प्रयासों के बाद भी वे इस कैद से आजाद नहीं हो सके और उन्होंने विनती भी की लेकिन बजरंगबली अपने प्रभु श्रीराम के कार्य में इतने मगन थे कि उन्हें कुछ सुनाई ही नहीं दिया। जब कार्य पूर्ण हो गया तब उन्हें शनिदेव का ख्याल आया तो उन्होंने तत्काल ही उन्हें आजाद किया। शनिदेव को भी अपनी भूल का एहसास हो चुका था और उन्होंने बजरंगबली से मांफी मांगी और कभी भी किसी राम काज में विघ्न न डालने का प्रण किया। वहीं शनिदेव ने यह भी कहा कि बजरंगबली की आराधना करने वालों और श्रीराम के भक्तों के ऊपर उनकी दया दृष्टि और विशेष कृपा रहेगी। इसके बाद बजरंगबली ने शनिदेव की चोटों को जल्द भरने के लिए उन्हें सरसों का तेल उपलब्ध करवाया। जैसे ही शनिदेव के घाव ठीक हुए तो उन्हें स्मृति में घटना का स्मरण करते हुए कहा कि शनिवार के दिन जो भक्त उन्हें सरसों का तेल चढ़ाएगा उसे उनकी विशेष कृपा प्राप्त होगी।

आखिर क्यों तेल चढाने से शनि होते हैं प्रसन्न, जरूर जानिए

Prabhat Jain

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